शिमला।
राजधानी शिमला के मंदिरों और बाज़ारों में एक संदिग्ध व्यक्ति के वेश बदलकर घूमने की खबरों के बीच शिमला पुलिस ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। 27 मार्च 2026 को मिली एक शिकायत के बाद की गई गहन जांच में उक्त व्यक्ति के दस्तावेज़ वैध पाए गए हैं और वह शहर के एक निजी विश्वविद्यालय का छात्र निकला है।
क्या था शिकायत का आधार?
पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक व्यक्ति, जो अपनी इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर खुद को बांग्लादेशी मुस्लिम बताता है, शिमला के लोअर और मिडल बाजार में साड़ी पहनकर (किन्नर के वेश में) लोगों से पैसे ऐंठ रहा है। शिकायत में उसके कालीबाड़ी मंदिर जाने पर भी आपत्ति जताई गई थी।
पुलिस जांच में सामने आई पहचान
शिकायत मिलते ही शिमला पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की। उक्त व्यक्ति की पहचान इस्लाम मोहम्मद शाहिदुल्ल (उम्र 30 वर्ष) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से राजशाही, बांग्लादेश का निवासी है।
वह वर्तमान में शिमला की APG यूनिवर्सिटी में BJMC (पत्रकारिता) के चौथे सेमेस्टर का छात्र है (सत्र 2024-2028)। पुलिस ने उसके पुराने और वर्तमान पासपोर्ट, स्टडी वीज़ा (Type S-1), स्टे वीज़ा (RCF/UCF) और नेशनल आईडी कार्ड की जांच की, जो पूरी तरह सही और वैध पाए गए हैं। छात्र की फीस स्लिप और 10वीं/12वीं की मार्कशीट भी सही पाई गई है।
पूछताछ में छात्र का पक्ष
पुलिस पूछताछ के दौरान छात्र ने बताया कि वह किन्नर समुदाय से संबंध रखता है और मां काली का अनन्य भक्त है। इसी धार्मिक आस्था के कारण वह कालीबाड़ी और जाखू मंदिर जाता रहता है। उसने स्पष्ट किया कि वह किसी से जबरन पैसे नहीं ऐंठता, लेकिन यदि कोई स्वेच्छा से उसे कुछ भेंट करता है, तो वह उसे स्वीकार कर लेता है।
पैसे ऐंठने की शिकायत नहीं
पुलिस के अनुसार, अभी तक किसी भी नागरिक ने इस व्यक्ति के खिलाफ डरा-धमकाकर पैसे वसूलने की कोई औपचारिक शिकायत नहीं की है। हालांकि, पुलिस मामले में हर पहलू से आगामी जांच जारी रखे हुए है। सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें। मामले की पूरी जांच कर ली गई है और विदेशी नागरिक के सभी दस्तावेज़ नियमानुसार वैध पाए गए हैं।