शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत शिमला पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने दूध और कुरकुरे के खाली पैकेटों में छिपाकर चिट्टा (हेरोइन) सप्लाई करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
इस नेटवर्क के मुख्य सप्लायर को हरियाणा के फरीदाबाद (बल्लभगढ़) से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के जरिए पिछले महज तीन महीनों में करीब 1.25 करोड़ रुपये का अवैध लेन-देन हुआ है।
बालूगंज थाने में दर्ज मामले से हुआ खुलासा
यह पूरी कार्रवाई पुलिस थाना बालूगंज में दर्ज अभियोग संख्या 27/2026 के तहत चल रही गहन तफ्तीश के दौरान अमल में लाई गई। इस मामले की शुरुआत 24 अप्रैल, 2026 को हुई थी, जब पुलिस ने जाल बिछाकर अविनाश चौहान (37) नाम के एक व्यक्ति को दबोचा था और उसके कब्जे से लगभग 7 ग्राम चिट्टा बरामद किया था।
अविनाश से मिली कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने बैकवर्ड लिंकेज के आधार पर बिहार के भोजपुर निवासी दो सगे भाइयों—विशाल यादव और जय प्रकाश यादव को गिरफ्तार किया।
फरीदाबाद से दबोचा गया मुख्य डिस्ट्रीब्यूटर
भोजपुर के दोनों भाइयों से पूछताछ और वित्तीय लेन-देन (Financial Trail) खंगालने पर पुलिस के हाथ इस नेटवर्क के 'मास्टरमाइंड' तक पहुंचे। पुलिस को पता चला कि मूल रूप से छतरपुर (मध्य प्रदेश) का रहने वाला 21 वर्षीय रवि अहिरवार, जो वर्तमान में बल्लभगढ़ (फरीदाबाद, हरियाणा) में रह रहा था,
इस पूरे नेटवर्क का मुख्य डिस्ट्रीब्यूटर है। शिमला पुलिस की एक विशेष टीम ने फरीदाबाद में दबिश देकर 5 जून को रवि अहिरवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
दूध और कुरकुरे के पैकेट बनते थे ढाल
शिमला के पुलिस अधीक्षक (SP) संजीव कुमार गांधी (या संबंधित एसपी गौरव सिंह) के निर्देशानुसार दी गई जानकारी के मुताबिक, आरोपी रवि अहिरवार बेहद शातिराना अंदाज में तस्करी करता था।
वह मोहाली (पंजाब) को अपना बेस बनाकर पिछले एक साल से हिमाचल में हेरोइन की खेप भेज रहा था। चेकिंग से बचने के लिए वह दूध, कुरकुरे और स्नैक्स के खाली पैकेटों के भीतर चिट्टा छिपाकर पैक करता था और इन्हें शिमला के आईएसबीटी (ISBT) टुटीकंडी तथा आसपास के इलाकों में अपने एजेंटों को सप्लाई करता था।
50 बार आ चुका था शिमला, कमीशन पर करता था काम
पुलिस की वित्तीय जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी रवि अहिरवार कमीशन के आधार पर इस गिरोह के लिए काम करता था। वह पिछले एक साल में करीब 50 बार खुद शिमला आकर ड्रग्स की खेप डिलीवर कर चुका था।
पिछले तीन महीनों के भीतर ही इस नेटवर्क के बैंक खातों में 1.25 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन पाए गए हैं। पुलिस अब इस वित्तीय नेटवर्क से जुड़े अन्य बैंक खातों और स्थानीय पैडलर्स की कुंडली खंगाल रही है, जिससे इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना है।