मंडी
हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक तीर्थ स्थान ऋषि पराशर की तपोस्थली में जिला स्तरीय तीन दिवसीय पराशर सरानाहुली मेले का पारंपरिक और हर्षोल्लास के साथ शुभारंभ हो गया है।
इस धार्मिक उत्सव को देखने और पुण्य लाभ कमाने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पराशर पहुंच रहे हैं। मेले को सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए प्रशासन, पुलिस और राजस्व विभाग द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े प्रबंध किए गए हैं।
देव शुकदेव थटा के आगमन से हुई शुरुआत, निभाई गईं ये खास रस्में:
पराशर मेले की शुरुआत सदियों पुरानी अनूठी परंपराओं के साथ होती है:
शिखर पर कलश स्थापना: परंपरानुसार देव शुकदेव थटा के आगमन से मेले का आगाज होता है। सर्वप्रथम देव शुकदेव के मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही मंदिर के शिखर पर पारंपरिक कलश स्थापित किया जाता है।
पवित्र देवस्नान: कलश स्थापना के तुरंत बाद देवता पराशर झील के पवित्र पानी में देवस्नान करते हैं और उसके बाद मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते हैं।
देवी-देवताओं का महामिलन: देव शुकदेव की रस्मों के उपरांत चारों ओर की घाटियों से अन्य देवी-देवताओं का पराशर पहुंचना शुरू होता है। देवताओं के इस महामिलन के भव्य दृश्य का दीदार करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
मेला कमेटी और स्थानीय जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
मेले के शुभारंभ के इस पावन अवसर पर इलाके के कई गणमान्य लोग और विभिन्न देव कमेटियों के पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
उत्तराशाल पराशर बाह्य ताम कमेटी के अध्यक्ष
ग्राम पंचायत सेगली के उप प्रधान चरण सिंह
देव कमेटी सुरन, देव कमेटी सुहड़ा तथा गहरी कमेटी के समस्त पदाधिकारी
स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा मेले में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पीने के पानी, ठहरने, यातायात नियंत्रण और कानून व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि तीन दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भक्तों को किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े।