मंडी
कहावत है कि जाको राखे साइयां, मार सके न कोय और इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है मंडी जिले के बल्ह क्षेत्र के एक जांबाज व्यक्तित्व ने। जहाँ एक ओर बीएसएल (BSL) परियोजना की खुली नहर अपने तेज बहाव के कारण 'खूनी नहर' के रूप में जानी जाती है, वहीं दूसरी ओर दयारगी पंचायत के पूर्व प्रधान श्री बालक राम कौशल इस नहर के लिए एक 'जीवन रक्षक' फरिश्ता बनकर उभरे हैं।
तमाशबीन बनी भीड़, रक्षक बने बालक राम
हाल ही में हुई एक घटना में, जब एक नौजवान बीएसएल नहर के तेज और बर्फीले पानी में डूब रहा था, तो किनारे पर लोगों का हुजूम जमा हो गया। कड़कड़ाती ठंड और नहर के जानलेवा बहाव को देखकर किसी की भी हिम्मत पानी में उतरने की नहीं हो रही थी। जब सब तमाशा देख रहे थे, तब पूर्व प्रधान बालक राम कौशल ने बिना एक पल गंवाए और अपनी जान की परवाह किए बिना नहर में छलांग लगा दी।
बिना किसी सुरक्षा उपकरण के साहसिक बचाव
हैरानी और गर्व की बात यह है कि श्री बालक राम के पास न तो कोई लाइफ जैकेट थी और न ही कोई आधुनिक बचाव उपकरण। उन्होंने निस्वार्थ भाव और अदम्य साहस का परिचय देते हुए उस युवक को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समाज में जहाँ लोग अक्सर खुद को बचाने की सोचते हैं, बालक राम जी ने यह साबित कर दिया कि निस्वार्थ सेवा और मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है।
क्षेत्र में 'जीवन रक्षक' के नाम से पहचान
यह पहली बार नहीं है जब श्री बालक राम कौशल ने ऐसा साहसिक कार्य किया हो। वे क्षेत्र में 'जीवन रक्षक' के नाम से विख्यात हैं। बल्ह तहसील और दयारगी पंचायत के लोग उनकी इस बहादुरी के कायल हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे हमेशा आपदा के समय सबसे आगे खड़े रहते हैं और कई परिवारों के चिरागों को बुझने से बचा चुके हैं।
समाज के लिए एक बड़ी मिसाल
बालक राम जी का यह कृत्य न केवल एक जीवन को बचाना है, बल्कि हमारे समाज के लिए एक बहुत बड़ा सबक भी है। उन्होंने सिखाया है कि इंसानियत आज भी जिंदा है। पूरा क्षेत्र और सोशल मीडिया पर लोग भगवान और प्रकृति से उनकी लंबी आयु और उनके परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।