शिमला
हिमाचल प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 राज्य की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के रुझान और संरचनात्मक बदलावों को रेखांकित करता है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं और जलवायु संबंधी चुनौतियों के बावजूद प्रदेश की अर्थव्यवस्था में विस्तार दर्ज किया गया है।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) लगभग 2.54 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.1 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। स्थिर कीमतों (2011-12) पर विकास दर 8.3 प्रतिशत आंकी गई है।
प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 2,83,626 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष से 9.8 प्रतिशत अधिक है और राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है।
आर्थिक संरचना में सेवा क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक 46.3 प्रतिशत है, जबकि उद्योग क्षेत्र 39.4 प्रतिशत और कृषि क्षेत्र 14.3 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। सेवा क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार, परिवहन और वित्तीय गतिविधियों का विस्तार प्रमुख कारक रहा है।
कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में 2025-26 के दौरान 8.3 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया गया है। उत्पादन और कीमतों में सुधार के चलते यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
औद्योगिक क्षेत्र का अनुमानित आकार 94,381 करोड़ रुपये है, जिसमें 7.77 प्रतिशत वृद्धि की संभावना है। निर्माण गतिविधियों में 12.56 प्रतिशत तक वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जिसे रोजगार और बुनियादी ढांचे से जोड़ा जा रहा है।
पर्यटन क्षेत्र में महामारी के बाद सुधार देखा गया है। पर्यटकों की संख्या 2020 के 32 लाख से बढ़कर 2025 में लगभग 3.11 करोड़ तक पहुंच गई है, जिससे आय और रोजगार पर प्रभाव पड़ा है।
ऊर्जा क्षेत्र, विशेषकर जलविद्युत परियोजनाओं से, दिसंबर 2025 तक 1668 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जिसमें आगे भी वृद्धि की संभावना जताई गई है।
महंगाई के संदर्भ में, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में गिरावट दर्ज की गई है और शहरी क्षेत्रों में महंगाई दर निम्न स्तर पर बनी हुई है।
सामाजिक अवसंरचना के तहत राज्य में 115 सिविल अस्पताल और 586 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे हैं। परिवहन क्षेत्र में बसों और इलेक्ट्रिक वाहनों के माध्यम से कनेक्टिविटी में विस्तार किया गया है।
सर्वेक्षण में यह भी संकेत दिया गया है कि बुनियादी ढांचे, पर्यटन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और उद्यमिता से जुड़े क्षेत्रों में आगे की नीतिगत दिशा तय की जा रही है, जिसमें डेटा आधारित योजना पर जोर दिया गया है।