मंडी
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में रसोई गैस की कालाबाजारी और वितरण प्रणाली में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। ताज़ा घटनाक्रम में उपभोक्ताओं को बिना गैस सिलेंडर मिले ही उनके मोबाइल पर 'सफलतापूर्वक डिलीवरी' के मैसेज प्राप्त हो रहे हैं। हद तो तब हो गई जब सिलेंडर के बिना ही उपभोक्ताओं के बैंक खातों में सब्सिडी की राशि भी जमा कर दी गई।
सदर उपमंडल की ग्राम पंचायत वाड़ी गुमानू के निवासी और भारतीय सेना से सेवानिवृत्त किशन चंद इस अजीबोगरीब गड़बड़ी के शिकार हुए हैं। किशन चंद ने नियमानुसार रसोई गैस बुक करवाई थी।
उन्हें सिलेंडर मिलने का इंतज़ार था, लेकिन अचानक उनके मोबाइल पर मैसेज आया कि उनका सिलेंडर डिलीवर हो चुका है। चकित करने वाली बात यह है कि सिलेंडर मिले बिना ही उनके बैंक खाते में सब्सिडी के 39 रुपये भी जमा हो गए।
अब किशन चंद और उनके जैसे कई अन्य उपभोक्ताओं के सामने संकट खड़ा हो गया है क्योंकि रिकॉर्ड में सिलेंडर 'डिलीवर' दिखने के कारण वे दोबारा बुकिंग नहीं कर पा रहे हैं।
यह अकेले किशन चंद की कहानी नहीं है; क्षेत्र के कई अन्य ग्रामीणों के साथ भी ऐसा ही हुआ है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर उपभोक्ताओं के नाम पर बुक किए गए ये सिलेंडर जा कहाँ रहे हैं? क्या गैस एजेंसियों के कर्मचारी या बिचौलिए इन सिलेंडरों को ब्लैक मार्केट में बेच रहे हैं?
मैं हैरान हूँ कि बिना घर पहुँचे मेरा सिलेंडर कैसे डिलीवर हो गया और सब्सिडी भी आ गई। अब मेरे पास खाना बनाने के लिए गैस खत्म होने वाली है और सिस्टम मुझे दूसरा सिलेंडर बुक नहीं करने दे रहा। — किशन चंद, पूर्व सैनिक
इस गंभीर मामले पर संबंधित विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मंडी जिले में रसोई गैस की कोई कमी नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि यदि वितरण में कहीं कोई गड़बड़ी या धोखाधड़ी हुई है, तो उसकी गहन जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।