हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर याचिकाकर्ता होशियार सिंह को पीईटी पद पर नियुक्ति देने और 2008 से काल्पनिक वित्तीय लाभ व वरिष्ठता देने के निर्देश दिए।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दिव्यांगों के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि दिव्यांग श्रेणी के भीतर जाति, धर्म या वर्ग के आधार पर उप-आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगों को मिलने वाला क्षैतिज आरक्षण सभी पात्र दिव्यांग उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू होगा और इसके भीतर अलग से जातिगत आरक्षण देना संविधान के अनुरूप नहीं है।
न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की एकल पीठ ने वर्ष 2008 की पीईटी (शारीरिक शिक्षा शिक्षक) भर्ती से जुड़े मामले में याचिकाकर्ता होशियार सिंह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर नियुक्ति देने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को वर्ष 2008 से काल्पनिक वित्तीय लाभ (Notional Benefits) और वरिष्ठता प्रदान की जाए।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार निर्धारित तीन माह की अवधि के भीतर नियुक्ति नहीं देती है, तो इसके बाद याचिकाकर्ता पूर्ण वेतन का भी हकदार होगा।
अदालत ने यह तर्क भी खारिज कर दिया कि संबंधित पद केवल कुल्लू जिले के उम्मीदवार को ही दिया जाना चाहिए था। कोर्ट ने कहा कि राज्य का कोई भी पात्र दिव्यांग उम्मीदवार प्रदेश के किसी भी जिले में भर्ती के लिए आवेदन और चयन का अधिकार रखता है।
मामले के अनुसार, वर्ष 2008 में राज्य सरकार ने दिव्यांग श्रेणी के तहत सी एंड वी कैडर में पीईटी पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाया था। 27 जनवरी 2008 को कुल्लू में आयोजित पहले साक्षात्कार में होशियार सिंह ने 38.11 अंक हासिल कर मेरिट सूची में पहला स्थान प्राप्त किया था।
बाद में यह साक्षात्कार रद्द कर दिया गया और 28 फरवरी 2008 को दोबारा इंटरव्यू आयोजित किया गया। इस दौरान सरकार ने यह कहते हुए होशियार सिंह का चयन नहीं किया कि श्रवण बाधित श्रेणी का पद अनुसूचित जाति के दिव्यांग उम्मीदवार के लिए आरक्षित था, जबकि वह सामान्य वर्ग के दिव्यांग हैं।
रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि दिव्यांग कोटे के भीतर अनुसूचित जाति का उप-आरक्षण लागू करना मनमाना, तर्कहीन और कानून के विरुद्ध था। अदालत ने इस आधार पर राज्य सरकार के निर्णय को असंवैधानिक मानते हुए याचिकाकर्ता को नियुक्ति देने के निर्देश जारी किए।
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