एकलपीठ का अंतरिम आदेश रद्द, कोर्ट ने कहा- 58 वर्ष में सेवानिवृत्ति का नियम पेश नहीं कर सका ट्रस्ट; सेवा 60 वर्ष तक जारी रहेगी, अंतिम फैसला मुख्य याचिका पर निर्भर
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बाबा बालक नाथ मंदिर ट्रस्ट दियोटसिद्ध की ओर से संचालित कॉलेज के एक शिक्षक को सेवा से जुड़े मामले में बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने शिक्षक जोगिंदर पाल को 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बनाए रखने का आदेश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश चिराग भानु सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए एकलपीठ के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता को 60 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रखने की अनुमति देने से इनकार किया गया था।
कोर्ट के इस आदेश के बाद शिक्षक को फिलहाल 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि 60 वर्ष की आयु के बाद किसी प्रकार का सेवा विस्तार नहीं दिया जाएगा।
58 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति का दिया गया था आदेश
मामला उस समय सामने आया जब बाबा बालक नाथ मंदिर ट्रस्ट ने शिक्षक जोगिंदर पाल को 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त करने का आदेश जारी किया था। ट्रस्ट के आदेश के अनुसार उनकी सेवानिवृत्ति 31 जुलाई 2025 को होनी थी।
इसके खिलाफ शिक्षक ने हाईकोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान मुख्य सवाल यह था कि क्या ट्रस्ट के कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु 58 वर्ष निर्धारित करने वाला कोई स्पष्ट सेवा नियम मौजूद है।
मामले की सुनवाई के दौरान ट्रस्ट की ओर से ऐसा कोई सेवा नियम प्रस्तुत नहीं किया जा सका, जिसमें उसके कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष निर्धारित होने की बात स्पष्ट रूप से कही गई हो।
2001 में 4 हजार रुपये के वेतन पर हुई थी नियुक्ति
याचिकाकर्ता जोगिंदर पाल की नियुक्ति 5 जुलाई 2001 को अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर की गई थी। उस समय उन्हें स्कूल कैडर में 4,000 रुपये प्रतिमाह के समेकित वेतन पर नियुक्त किया गया था।
इसके बाद वर्ष 2006 में उन्हें गेस्ट फैकल्टी के तौर पर रखा गया। 16 दिसंबर 2009 को उनकी सेवाएं नियमित अनुबंध के आधार पर जारी रखी गईं। इस दौरान उन्होंने संस्थान में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दीं।
करीब 18 साल बाद नियमित हुई सेवाएं
जोगिंदर पाल की सेवाओं को लंबे समय बाद नियमित किया गया। 9 अप्रैल 2019 को करीब 18 वर्ष की सेवा के बाद उन्हें 10,300-34,800 रुपये के वेतनमान और 4,200 रुपये ग्रेड पे में नियमित किया गया।
इसके बाद उनकी सेवानिवृत्ति आयु को लेकर विवाद खड़ा हुआ। ट्रस्ट ने उन्हें 58 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त करने का आदेश जारी किया, जबकि याचिकाकर्ता ने इस निर्णय को चुनौती दी।
ट्रस्ट नहीं दिखा सका 58 वर्ष की सेवानिवृत्ति का नियम
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के समक्ष यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि ट्रस्ट याचिकाकर्ता की सेवानिवृत्ति 58 वर्ष की आयु में करने के समर्थन में ऐसा कोई सेवा नियम पेश नहीं कर सका, जिसमें कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष निर्धारित की गई हो।
इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए खंडपीठ ने एकलपीठ के अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया और याचिकाकर्ता को 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बनाए रखने का आदेश दिया।
मुख्य याचिका के अंतिम फैसले पर निर्भर रहेगा आदेश
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि शिक्षक को 60 वर्ष से अधिक आयु तक सेवा विस्तार का अधिकार नहीं होगा। इसके अलावा 60 वर्ष तक सेवा जारी रखने का यह आदेश मुख्य याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।
इसका अर्थ है कि फिलहाल याचिकाकर्ता को 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने की राहत मिली है, लेकिन मामले का अंतिम कानूनी निर्णय मुख्य याचिका पर होने वाली सुनवाई के बाद ही होगा।
हाईकोर्ट के आदेश से शिक्षक को मिली बड़ी राहत
हाईकोर्ट के इस फैसले से जोगिंदर पाल को तत्काल राहत मिली है। 58 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति के आदेश के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई में खंडपीठ ने उन्हें 60 वर्ष तक सेवा जारी रखने की अनुमति दी है।
वहीं, मामले की अंतिम स्थिति मुख्य याचिका पर होने वाले निर्णय के बाद स्पष्ट होगी। फिलहाल कोर्ट के आदेश के अनुसार शिक्षक को 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बनाए रखने का प्रावधान लागू रहेगा।
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