शिमला।
हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर प्रदेश उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तर्ज पर 60% महंगाई भत्ते की मांग को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य की सुक्खू सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज ने याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता, जो शिक्षा विभाग में अधीक्षक (सुपरिटेंडेंट) के पद पर तैनात है, ने अदालत के समक्ष दलील दी कि वर्तमान में हिमाचल सरकार केवल 45 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दे रही है, जो एक जुलाई 2023 से प्रभावी है।
वहीं, दूसरी ओर केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता दे रही है। इस प्रकार, केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के बीच डीए में 15 प्रतिशत का सीधा अंतर आ गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस अंतर के कारण उन्हें हर महीने लगभग 10,000 रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है।
याचिका में बताया गया कि राज्य सरकार ने समय-समय पर डीए में वृद्धि तो की, लेकिन वह केंद्र की तुलना में काफी पीछे है फरवरी 2022: 28 से 31%, अप्रैल 2023: 31 से 34%, मार्च 2024: 34 से 38%, अक्टूबर 2024: 38 से 42%, अक्टूबर 2025: 42 से 45%।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि राज्य के कर्मचारियों को भी केंद्र सरकार के समान ही महंगाई भत्ता प्रदान किया जाए ताकि उन्हें वित्तीय नुकसान न उठाना पड़े। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से जवाब माँगा है। इस महत्वपूर्ण मामले पर अगली सुनवाई अब 4 जून 2026 को होगी।
हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद प्रदेश के लाखों कर्मचारियों में उम्मीद की किरण जगी है। लंबे समय से कर्मचारी संगठन केंद्र के समान डीए और बकाया एरियर की मांग कर रहे हैं। राज्य की वित्तीय स्थिति के बीच अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार अदालत में क्या तर्क पेश करती है।