मंडी। करीब 1100 करोड़ रुपये मूल्य की बताई जा रही पुश्तैनी भूमि के मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने मीर बख्श मामले में दायर समीक्षा याचिका (रिव्यू पिटीशन) को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही 19 जुलाई 2023 को सुनाया गया फैसला बरकरार रहेगा और राज्य सरकार को मीर बख्श को 110 बीघा भूमि उपलब्ध करवानी होगी।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्या कांत और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने सर्कुलेशन के आधार पर मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पूर्व फैसले की समीक्षा के लिए कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता। अदालत ने समीक्षा याचिका को खारिज करने के साथ ही लंबित अन्य अंतरिम आवेदनों का भी निपटारा कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब सरकार के लिए मीर बख्श को भूमि देने का रास्ता लगभग तय हो गया है। मंडी प्रशासन पहले ही सुंदरनगर, बल्ह, नाचन और मंडी क्षेत्र में विभिन्न सरकारी विभागों की जमीन चिन्हित कर राज्य सरकार को प्रस्ताव भेज चुका है।
बताया जा रहा है कि चयनित भूमि में नेरचौक मेडिकल कॉलेज के आसपास की करीब 15 बीघा भूमि, छात्र स्थित कृषि विभाग का फार्म, हराबाग में एचपीएमसी का बगीचा, गडारी और छात्र में कृषि विभाग की करीब 94 बीघा जमीन, भौर क्षेत्र में सेरीकल्चर विभाग की 10 बीघा तथा उद्योग विभाग की 35 बीघा भूमि शामिल है।
मीर बख्श का दावा है कि उनकी मूल भूमि वर्तमान समय में अत्यंत मूल्यवान हो चुकी है और उसकी कीमत 1100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। उनका कहना है कि सरकार ने उनकी प्राइम लोकेशन वाली जमीन का उपयोग विभिन्न सरकारी संस्थानों के लिए किया है, इसलिए बदले में भी समान महत्व और मूल्य की भूमि ही दी जानी चाहिए।
यह मामला पिछले 29 वर्षों से अदालतों में चल रहा है। वर्ष 1996 में पहली बार इस भूमि को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हुई थी। लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका को 25 हजार रुपये के जुर्माने के साथ खारिज कर मीर बख्श के पक्ष में फैसला सुनाया था और भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
मामले की पृष्ठभूमि भारत-पाक विभाजन से भी जुड़ी हुई है। वर्ष 1947 के दंगों में मीर बख्श ने अपने परिवार के करीब 20 सदस्यों को खो दिया था। उस समय उन्हें और उनके परिजनों को पाकिस्तान चले जाने वाला मान लिया गया। बाद में उनकी 110 बीघा भूमि पर नेरचौक मेडिकल कॉलेज, एसडीएम कार्यालय समेत कई सरकारी संस्थान स्थापित कर दिए गए।
हिमाचल हाईकोर्ट के अधिवक्ता आर.एल. चौधरी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट द्वारा समीक्षा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब राज्य सरकार को मीर बख्श को 110 बीघा भूमि उपलब्ध करवानी ही होगी। उन्होंने बताया कि मंडी प्रशासन द्वारा चिन्हित भूमि पर मीर बख्श पहले ही सहमति जता चुके हैं और अब अंतिम निर्णय राज्य सरकार को लेना है।
भूमि चयन की प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति की कई बैठकों के बाद पूरी हुई है। एडीएम मदन कुमार की अध्यक्षता वाली इस समिति में बल्ह की एसडीएम स्मृतिका नेगी और मंडी के अटॉर्नी ऑफिसर शामिल रहे।
प्रशासनिक स्तर पर सभी औपचारिकताएं पूरी कर मामला सरकार को भेजा जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। :::