शिमला
हिमाचल प्रदेश के कला और सांस्कृतिक जगत के लिए एक बेहद गौरवशाली खबर सामने आई है। प्रदेश के सुप्रसिद्ध युवा लोकगायक इंद्रजीत का चयन देश के अत्यंत प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार' के लिए किया गया है।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन संचालित स्वायत्तशासी संस्था, संगीत नाटक अकादमी द्वारा जारी आधिकारिक सूची में उनके नाम की घोषणा की गई है। यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान उन्हें हिमाचली लोकसंगीत, लोकसंस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पटल पर नई पहचान दिलाने में उनके असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया जा रहा है।
बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के हासिल किया मुकाम
मूल रूप से जिला कुल्लू के रहने वाले इंद्रजीत की यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि उन्होंने संगीत की कोई औपचारिक या पारंपरिक ट्रेनिंग (Formal Training) नहीं ली है।
अपनी अटूट लगन, कड़ी मेहनत और अनूठी आवाज के दम पर उन्होंने बेहद कम समय में लोकगायन के क्षेत्र में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। उनके गीतों में देवभूमि की मिट्टी की सोंधी महक, पारंपरिक रीति-रिवाजों, स्थानीय बोलियों और पहाड़ी जनजीवन का सजीव चित्रण मिलता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों श्रोता, 'पाखली माणु' जैसे गीत सुपरहिट
इंद्रजीत के गाए हुए गीत देश ही नहीं बल्कि विदेशों में रहने वाले हिमाचली प्रवासियों के बीच भी बेहद लोकप्रिय हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और यूट्यूब पर उनके गीतों को करोड़ों बार देखा और सुना जा चुका है। उनके सबसे चर्चित और सुपरहिट गीतों में शामिल हैं 'लाड़ी शाऊंणी', 'पाखली माणु', 'बुधूआ मामा', 'तिरछी नज़रे', 'सोलमा लाड़ी'।
संगीत के जरिए सामाजिक चेतना: 'चिट्टा मुक्त हिमाचल' मुहिम
मनोरंजन से आगे बढ़कर लोकगायक इंद्रजीत ने अपने संगीत को सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एक मजबूत हथियार बनाया है। देवभूमि के युवाओं को नशे की गर्त से बाहर निकालने के लिए उनके द्वारा गाए जागरूकता गीत "मता करदे नशा" और हाल ही में रिलीज हुए "चिट्टा मुक्त हिमाचल" एंथम को समाज में व्यापक सराहना मिली है।
इसके अलावा, उनका गीत 'पाखली माणु' हिमाचल के राज्य पक्षी (भूतपूर्व) व लुप्तप्राय मोनाल पक्षी के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने में बेहद असरदार साबित हुआ है。
कला और सामाजिक जगत में खुशी की लहर
जैसे ही संगीत नाटक अकादमी द्वारा इंद्रजीत को इस राष्ट्रीय सम्मान के लिए चुने जाने की खबर आई, पूरे प्रदेश के सामाजिक और सांस्कृतिक जगत में खुशी की लहर दौड़ गई। हाल ही में हिमाचल के महामहिम राज्यपाल द्वारा भी उन्हें लोक भवन में उनके उत्कृष्ट सांस्कृतिक कार्यों के लिए प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है।
स्थानीय कलाकारों और प्रबुद्ध जनों का कहना है कि इस पुरस्कार से हिमाचली संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर एक नया गौरव मिला है।