शिमला। हिमाचल प्रदेश में जनगणना 2027 के पहले चरण ‘मकान सूचीकरण और मकानों की गणना’ का सोमवार से औपचारिक शुभारंभ हो गया। यह अभियान 16 जून से 15 जुलाई तक प्रदेशभर में चलाया जाएगा। जनगणना कार्य निदेशालय के अनुसार सभी जिलों में प्रगणकों और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण 13 जून तक पूरा कर लिया गया है।
इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जा रही है। इसके लिए प्रगणक एचएलओ (HLO) मोबाइल एप का उपयोग कर घर-घर जाकर आंकड़े एकत्र करेंगे। जिन नागरिकों ने 1 से 15 जून के बीच ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना (Self Enumeration) पूरी कर ली है, वे पहले चरण के दौरान अपनी स्व-गणना आईडी प्रगणकों को उपलब्ध करवा सकते हैं।
हालांकि यदि किसी कारणवश नागरिक ऑनलाइन स्व-गणना नहीं कर पाए हैं, तो उन्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। 16 जून से 15 जुलाई के बीच प्रगणक घर-घर जाकर आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे।
जनगणना कार्य निदेशालय ने नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1855 भी जारी किया है। जनगणना से जुड़ी किसी भी आधिकारिक जानकारी या सहायता के लिए इस नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। निदेशालय ने प्रदेशवासियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय सहयोग देने की अपील की है।
33 प्रश्नों के जरिए जुटाई जाएगी जानकारी
जनगणना के पहले चरण में प्रगणक आधिकारिक रूप से निर्धारित 33 प्रश्नों के माध्यम से मकान और परिवारों से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे। इसमें घर की बुनियादी सुविधाओं जैसे पेयजल, बिजली, शौचालय, अनाज की उपलब्धता और विभिन्न घरेलू उपकरणों से संबंधित विवरण शामिल होगा।
क्यूआर कोड से होगी पहचान की पुष्टि
नागरिकों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक प्रगणक के पहचान पत्र पर क्यूआर कोड उपलब्ध होगा। आम नागरिक इस क्यूआर कोड को स्कैन कर प्रगणक की पहचान और वैधता की पुष्टि कर सकते हैं।
निदेशालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान किसी भी व्यक्ति से बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी या किसी प्रकार के वित्तीय दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे। लोगों को ऐसी किसी भी भ्रामक सूचना या धोखाधड़ी से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।