व्यास पूजन, गुरु पादुका पूजन और नाम संकीर्तन में बड़ी संख्या में शामिल हुए श्रद्धालु, गुरु-शिष्य परंपरा का दिया संदेश
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर पुरानी मंडी स्थित चातुर्मास कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन किया गया। महंत स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में मंडी और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
व्यास पूजन और गुरु पादुका पूजन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत व्यास पूजन और गुरु पादुका पूजन से हुई। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, आस्था और कृतज्ञता व्यक्त की। इसके बाद गुरु वंदना प्रस्तुत की गई और पूरे परिसर में गुरु महिमा के जयघोष गूंजते रहे।
गुरु ही ज्ञान और आत्मबोध का मार्ग दिखाते हैं
अपने आशीर्वचन में महंत स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि गुरु मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर सत्य, ज्ञान और आत्मबोध के मार्ग पर ले जाते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से सेवा, सदाचार, संयम और संस्कारपूर्ण जीवन अपनाने का आह्वान करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ वातावरण
धार्मिक अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
दोपहर बाद आयोजित गुरु पूर्णिमा नाम संकीर्तन में भजन-कीर्तन और गुरु स्तुति से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह, श्रद्धा और अनुशासन के साथ कार्यक्रम में सहभागिता निभाई।
आयोजन समिति ने जताया आभार
आयोजन समिति ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, सेवाभावी कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
समिति ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान की भावना को और अधिक मजबूत करते हैं।
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