फरीदाबाद ।
फरीदाबाद की उस शाम ने एक दिल दहला देने वाली कहानी लिख दी। फतेहपुर बिल्लौच इलाके में रहने वाला भागवत दयाल अपने दो मासूम बेटों को साथ लेकर आगरा नहर तक पहुंचा। और फिर एक ऐसा खौफनाक कदम उठा लिया, जिसने तीन जिंदगियों को लील लिया और एक परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया रविवार की शाम बिना किसी शोर-शराबे के… वह अपने दोनों बच्चों
के साथ नहर में कूद गया। यह कोई हादसा नहीं था। यह एक ऐसा फैसला था, जिसे समझ पाना आज भी मुश्किल है कुछ ही पलों में तेज बहाव ने तीनों को अपने अंदर समा लिया और पीछे छूट गई सिर्फ खामोशी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। पूरी रात सर्च ऑपरेशन चलता रहा अंधेरा, ठंडा पानी और बहती धारा हर चीज जैसे उम्मीद के खिलाफ खड़ी थी।
उधर घर में मातम पसरा था एक पत्नी जो बार-बार दरवाजे की ओर देख रही थी। शायद कोई चमत्कार हो जाए शायद उसके अपने लौट आएं। लेकिन रात गुजर गई और कोई नहीं लौटा। सुबह होते ही एक फोन आया और उसी एक फोन ने टूट चुकी उम्मीद में हल्की सी सांस भर दी।
“आपका बेटा जिंदा है” 9 साल का सम्राट जो पूरी रात मौत के साथ बहता रहा करीब 5 किलोमीटर दूर मांदकोल गांव तक पहुंच गया। अंधेरी रात ठंडा, गंदा पानी और चारों तरफ डर लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने एक पेड़ की टहनी पकड़ ली और उसी टहनी को अपनी जिंदगी का सहारा बना लिया। सुबह जब गांव के दो युवक सैर के लिए पहुंचे तो एक कमजोर सी आवाज सुनाई दी—“मुझे बचा लो”
राजेंद्र नाम के युवक ने बिना एक पल गंवाए नहर में छलांग लगा दी और उस मासूम को मौत के मुंह से खींच लाया। लेकिन इस राहत के पीछे एक असहनीय सच्चाई भी थी। भागवत दयाल और उसका दूसरा बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनके शव यूपी के छाता क्षेत्र से बरामद किए गए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है आखिर एक पिता ने ऐसा खौफनाक कदम क्यों उठाया?
क्या हालात इतने खराब हो गए थे कि उसे अपने बच्चों के साथ जिंदगी खत्म करना ही रास्ता लगा…? क्या वह किसी ऐसे दर्द से गुजर रहा था, जिसे वह किसी से कह नहीं पाया ? एक तरफ मां के लिए जिंदा बचा बेटा है तो दूसरी तरफ पति और एक बेटे को खोने का गहरा, कभी न भरने वाला जख्म।
यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं बल्कि एक आईना है जब जिम्मेदारियां, दबाव और हालात इंसान को तोड़ देते हैं तो वह कभी-कभी ऐसे फैसले ले बैठता है, जिनकी कीमत पूरी जिंदगी चुकानी पड़ती है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है लेकिन पीछे छूट गया एक सवाल जो शायद लंबे समय तक गूंजता रहेगा एक पिता आखिर इतना मजबूर कैसे हो गया?