देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्राचीन मंदिर में नवाया शीश, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और लंगर से भक्तिमय रहा वातावरण
ऐतिहासिक नगरी चम्बा शनिवार को आस्था, भक्ति और उल्लास के रंग में रंगी नजर आई। अवसर था श्री गुरु नानक देव जी के ज्येष्ठ पुत्र और उदासीन परंपरा के प्रवर्तक बाबा श्री चंद्र जी महाराज के 532वें पावन प्रकाशोत्सव का।
प्रकाशोत्सव को लेकर प्राचीन मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। करीब एक माह से चल रही तैयारियों के बाद आयोजित इस धार्मिक समागम में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचे।
प्रकाशोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने बाबा श्री चंद्र जी महाराज के श्रीचरणों में शीश नवाया और सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। दिनभर मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन चलता रहा।
श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कार्यक्रमों में भाग लिया। इसके साथ ही लंगर-प्रसाद का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने प्रसाद ग्रहण किया। धार्मिक आयोजन के चलते पूरे मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा।
देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंची संगत
बाबा श्री चंद्र जी महाराज के प्रकाशोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। चम्बा के अलावा हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों और देश के अन्य राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचे। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। संगत ने बाबा जी के समक्ष माथा टेका और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।
प्रकाशोत्सव के आयोजन को लेकर मंदिर परिसर को विशेष रूप से तैयार किया गया था। धार्मिक अनुष्ठानों और भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालु बाबा श्री चंद्र जी महाराज की शिक्षाओं और उनके आध्यात्मिक योगदान को याद करते नजर आए। दिनभर चले कार्यक्रमों में श्रद्धा और उत्साह का विशेष संगम देखने को मिला।
पवित्र शिला से जुड़ी है ऐतिहासिक मान्यता
चम्बा की वादियों में बाबा श्री चंद्र जी महाराज से जुड़ी कई ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मान्यताएं सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र रही हैं। इनमें प्राचीन मंदिर परिसर में स्थापित पवित्र शिला का विशेष महत्व माना जाता है। इस शिला को लेकर स्थानीय स्तर पर प्रचलित मान्यता बाबा श्री चंद्र जी महाराज की चम्बा यात्रा और यहां से जुड़ी आध्यात्मिक परंपरा से संबंधित है।
लोकमान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में साधु-संतों के नगर में प्रवेश पर पाबंदी के कारण बाबा श्री चंद्र जी महाराज को रावी नदी के उस पार रोक दिया गया था। मान्यता है कि इसके बाद बाबा जी के आदेश पर इसी पवित्र शिला ने उन्हें रावी नदी पार कराई और नगर के तीन चक्कर लगाने के बाद यह शिला वर्तमान स्थान पर स्थापित हुई।
राजा ने मांगी थी क्षमा, पुत्र प्राप्ति का मिला आशीर्वाद
जनश्रुति के अनुसार, इस घटना के बाद चम्बा के तत्कालीन राजा बाबा श्री चंद्र जी महाराज के समक्ष नतमस्तक हुए और उनसे क्षमा मांगी। मान्यता है कि बाबा जी ने राजा को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। इसी घटना से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण मंदिर परिसर में स्थापित पवित्र शिला के प्रति श्रद्धालुओं की विशेष आस्था बनी हुई है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच यह कथा पीढ़ियों से चली आ रही है और चम्बा की धार्मिक एवं संत परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। प्रकाशोत्सव के अवसर पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में पहुंचकर इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।
मणिमहेश मार्ग के धनछो से भी जुड़ी जनश्रुति
बाबा श्री चंद्र जी महाराज से जुड़ी एक अन्य जनश्रुति के अनुसार, पवित्र शिला से उतरकर अंतर्ध्यान होने के बाद बाबा जी को अंतिम बार मणिमहेश मार्ग पर स्थित धनछो में देखा गया था। यह मान्यता भी चम्बा की संत परंपरा और बाबा श्री चंद्र जी महाराज से जुड़ी लोक आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बाबा श्री चंद्र जी महाराज का यह ऐतिहासिक मंदिर आज भी चम्बा की समृद्ध आध्यात्मिक और संत परंपरा का सजीव प्रतीक बना हुआ है। 532वें प्रकाशोत्सव के अवसर पर उमड़ी संगत ने एक बार फिर इस धार्मिक परंपरा के प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट की। पूजा-अर्चना, कीर्तन और लंगर-प्रसाद के साथ संपन्न हुए आयोजन ने चम्बा की धार्मिक विरासत और श्रद्धा की परंपरा को जीवंत किया।
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