जोगिंद्रनगर
हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के अंतर्गत आते जोगिंद्रनगर उपमंडल के लिए यह सप्ताह ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण रहा। देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य रक्षा अलंकरण समारोह के दौरान महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हिमाचल के होनहार लाल और भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी कैप्टन योगेंद्र ठाकुर को प्रतिष्ठित
शांतिकालीन वीरता पुरस्कार 'शौर्य चक्र' से विभूषित किया। उपमंडल की दारट बगला पंचायत के रहने वाले कैप्टन योगेंद्र की इस स्वर्णिम उपलब्धि से पूरे प्रदेश और विशेषकर उनके गृह क्षेत्र में जश्न का माहौल है।
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के मंसूबे किए थे नाकाम
कैप्टन योगेंद्र ठाकुर को यह सर्वोच्च सम्मान जम्मू-कश्मीर के बेहद संवेदनशील इलाके में चलाए गए एक जटिल आतंकरोधी अभियान (Counter-Terrorism Operation) में उनके अदम्य साहस के लिए दिया गया है।
मुठभेड़ के दौरान विपरीत परिस्थितियों और भारी गोलाबारी के बीच उन्होंने न केवल अद्भुत व्यक्तिगत वीरता का परिचय दिया, बल्कि अपनी अद्वितीय नेतृत्व क्षमता (Leadership) और सर्वोच्च कर्तव्यनिष्ठा के बल पर अपनी टीम को फ्रंट से लीड किया। उनके इस साहसिक कदम की बदौलत भारतीय सेना आतंकियों को मार गिराने और देश की सीमा को सुरक्षित रखने में कामयाब रही थी।
सैन्य अधिकारी के माता-पिता का सीना गर्व से चौड़ा
कैप्टन योगेंद्र ठाकुर एक सुशिक्षित और सम्मानित परिवार से संबंध रखते हैं। उनके पिता अनिल ठाकुर शिक्षा विभाग से बतौर प्रधानाचार्य (Principal) सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि उनकी माता बीना देवी एक कुशल गृहणी हैं।
जैसे ही राष्ट्रपति द्वारा कैप्टन योगेंद्र के सीने पर शौर्य चक्र सजाया गया, समारोह में मौजूद उनके माता-पिता की आँखें गर्व और खुशी से नम हो गईं। माता-पिता ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर नाज़ है, जिसने देश की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह न करते हुए वीरभूमि हिमाचल की गौरवशाली परंपरा को और आगे बढ़ाया है।
बधाई देने वालों का लगा तांता, क्षेत्र में खुशी की लहर
शौर्य चक्र मिलने की खबर मिलते ही दारट बगला पंचायत सहित पूरे जोगिंद्रनगर क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया से लेकर धरातल तक इस जांबाज फौजी को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने कैप्टन योगेंद्र ठाकुर और उनके परिवार को शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। लोगों का कहना है कि योगेंद्र की यह कामयाबी न केवल देवभूमि और वीरभूमि के युवाओं को भारतीय सेना में जाकर देश सेवा करने के लिए प्रेरित करेगी, बल्कि इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगी।