शिमला
हिमाचल प्रदेश की वीरभूमि के नाम देश की सुरक्षा और शौर्य के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। राजधानी शिमला के रहने वाले भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी मेजर अंशुल बाल्टू को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य रक्षा अलंकरण समारोह के दौरान महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रतिष्ठित 'शौर्य चक्र'
से सम्मानित किया। मेजर अंशुल बाल्टू को यह सर्वोच्च पदक मातृभूमि की रक्षा में उनके अदम्य साहस, अद्वितीय नेतृत्व क्षमता और सर्वोच्च कर्तव्यनिष्ठा का प्रदर्शन करने के लिए प्रदान किया गया है।
संकट के समय दिखाया था असाधारण साहस
सैन्य सूत्रों के अनुसार, मेजर अंशुल बाल्टू ने देश की सीमाओं की सुरक्षा और चुनौतीपूर्ण सैन्य ऑपरेशन्स के दौरान अपनी जान की परवाह न करते हुए अद्भुत वीरता का परिचय दिया था।
विपरीत परिस्थितियों में भी दुश्मनों के मंसूबों को नाकाम करने और अपनी टीम को फ्रंट से लीड करने के उनके इस जज्बे को देखते हुए ही केंद्र सरकार द्वारा उन्हें इस प्रतिष्ठित शांतिकालीन वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया था।
देवभूमि हिमाचल में जश्न का माहौल, युवाओं के लिए बने रोल मॉडल
जैसे ही राष्ट्रपति भवन में मेजर अंशुल बाल्टू के सीने पर शौर्य चक्र सजाया गया, पूरे हिमाचल प्रदेश सहित उनके गृह जिला शिमला में जश्न का माहौल बन गया। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर प्रदेश भर के सामाजिक संगठनों, प्रशासनिक अधिकारियों और आम जनता द्वारा उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी जा रही हैं।
मेजर अंशुल बाल्टू की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूरा हिमाचल प्रदेश गर्वित, हर्षित और आह्लादित है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि उनकी यह कामयाबी देवभूमि और वीरभूमि के लाखों युवाओं के भीतर देश सेवा का जज्बा पैदा करेगी और उन्हें भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होकर देश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित करेगी।