सलापड़ से सरचू तक शुरू हुआ अंतिम लोकेशन सर्वे, 475 किमी रेललाइन में बनेंगी करीब 60 सुरंगें; खराब मौसम से प्रभावित हो सकता है सर्वे
प्रस्तावित बिलासपुर-मनाली-लेह ब्रॉडगेज रेललाइन को लेकर अंतिम लोकेशन सर्वे का काम शुरू हो गया है। रेलवे की ओर से फाइनल लोकेशन सर्वे का जिम्मा संभाल रही निजी कंपनी की टीम ने सलापड़ से सरचू तक सर्वे शुरू किया है।
कंपनी ने पूरे सर्वे का काम करीब 40 दिनों में पूरा कर इसकी रिपोर्ट रेलवे को सौंपने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, मौसम खराब रहने की स्थिति में सर्वे का समय बढ़ सकता है।
475 किलोमीटर लंबी रेललाइन में बनेंगी करीब 60 सुरंगें
प्रस्तावित बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन की लंबाई करीब 475 किलोमीटर होगी। कठिन पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इस रेललाइन में करीब 60 सुरंगें बनाई जाएंगी।
इन सुरंगों के माध्यम से रेललाइन दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों को पार करेगी। सुरंगों के निर्माण में उत्तराखंड की पर्वतीय रेल परियोजनाओं में अपनाई गई तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की योजना है।
भूगर्भीय स्थिति और ट्रैक एलाइनमेंट का अध्ययन
अंतिम लोकेशन सर्वे के दौरान सुरंगों की लंबाई, क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति, ट्रैक की एलाइनमेंट और पुलों के संभावित स्थानों का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है।
हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रेललाइन का बड़ा हिस्सा सुरंगों के भीतर से गुजरेगा। इससे पहाड़ों की अधिक कटाई को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही बर्फबारी और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में रेल संचालन को सुरक्षित और सुगम बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
बैहना में सर्वे टीम को देखने पहुंचे स्थानीय लोग
बैहना क्षेत्र में सर्वे टीम के पहुंचने के बाद स्थानीय लोगों में भी परियोजना को लेकर उत्सुकता देखने को मिली। लोग मौके पर पहुंचकर सर्वे कर्मचारियों से प्रस्तावित रेलवे स्टेशन, ट्रैक और सुरंगों को लेकर जानकारी लेते रहे।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
बिलासपुर-मनाली-लेह रेल परियोजना को देश की महत्वपूर्ण सामरिक रेल परियोजनाओं में गिना जा रहा है। इसके पूरा होने से लद्दाख तक हर मौसम में रेल संपर्क स्थापित होने की उम्मीद है।
रेल संपर्क मजबूत होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की आवाजाही आसान होने के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की संभावना है।
फाइनल सर्वे कर रही कंपनी के सर्वेयर ने बताया कि पूरी रेललाइन का सर्वे 40 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, मौसम खराब रहने की स्थिति में इसमें कुछ अतिरिक्त समय लग सकता है।
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