पंडोह।
सराज विधानसभा क्षेत्र की लाइफलाइन माना जाने वाला माता बगलामुखी रोपवे अब पूरी तरह से निजी हाथों में सौंप दिया गया है। हिमाचल प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (RTDC) ने इसका संचालन 'स्की हिमालयास' कंपनी को दे दिया है।
इस बदलाव के साथ ही रोपवे के किरायों में भारी बढ़ोतरी और स्थानीय लोगों को मिलने वाली रियायतों में कटौती कर दी गई है, जिससे क्षेत्र में भारी रोष पनप रहा है।
किराए में वृद्धि और रियायतों पर कैंची
नई व्यवस्था लागू होते ही रोपवे का सामान्य किराया ₹350 से बढ़ाकर ₹400 कर दिया गया है। सबसे बड़ा झटका उन 12 पंचायतों को लगा है, जिनके लिए 2025 की भीषण आपदा के बाद यह रोपवे आवाजाही का एकमात्र साधन बना था।
आपदा के समय सराज की 12 पंचायतों के लिए किराया मात्र ₹50 तय किया गया था। लेकिन अब 9 पंचायतों की रियायत खत्म कर दी गई है। अब केवल 3 पंचायतों के बाशिंदों को ही रियायती दरों का लाभ मिलेगा, बाकी सभी को ₹400 चुकाने होंगे। अब रोपवे में सामान ले जाने के लिए भी अलग से चार्ज देना होगा:
5 किलो से 30 किलो तक: ₹30
30 किलो से अधिक: ₹1 प्रति किलो
गैस सिलेंडर/तरल पदार्थ: ₹2 प्रति लीटर
निजीकरण का गणित: RTDC को होगा फायदा?
RTDC के मुख्य महाप्रबंधक रोहित ठाकुर के अनुसार, रोपवे के संचालन में निगम को भारी खर्च उठाना पड़ रहा था। आरटीडीसी खुद सारा खर्च उठाती थी और स्की हिमालयास कंपनी को हर महीने करीब ₹15 लाख का भुगतान करती थी। अब कंपनी ही बिजली, डीजल और रखरखाव का सारा खर्च उठाएगी। इसके बदले कंपनी आरटीडीसी को सालाना ₹27,14,000 देगी, जिसमें हर साल 10% की बढ़ोतरी होगी।
स्थानीय जनता में आक्रोश: "जब तक पुल नहीं, तब तक किराया न बढ़े"
स्थानीय निवासियों नेत्र सिंह, चूड़ामणि, कांती राम और श्यामलाल ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि पंडोह से बखाली-कुकलाह जाने वाला मुख्य मार्ग और पुल अभी तक पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है।
कुकलाह का रास्ता अभी भी असुरक्षित है और हल्की बारिश में बंद हो जाता है। जब तक नया पुल और सड़क सुचारू नहीं हो जाती, तब तक 12 पंचायतों को दी गई ₹50 की छूट जारी रहनी चाहिए। — रेवती ठाकुर, पूर्व उप-प्रधान, कुकलाह
पर्यटन सीजन में बढ़ेगा बोझ
गर्मियों का सीजन शुरू होते ही माता बगलामुखी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं। ऐसे में किराए में ₹50 की बढ़ोतरी पर्यटकों और श्रद्धालुओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालेगी। सराज की आपदा प्रभावित जनता ने सरकार से मांग की है कि इस जनविरोधी फैसले पर पुनर्विचार किया जाए।