25 लाख लीटर पानी की क्षमता वाला विशाल जल टैंक बना बीत क्षेत्र की पहचान, 12.59 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ जल भंडारण ढांचा
हरोली उपमंडल के अमराली में सड़क किनारे खड़ा विशाल जल टैंक दूर से ही अपनी ऊंचाई के कारण लोगों का ध्यान खींच रहा है। जमीन से 111 फीट 6 इंच की ऊंचाई पर बना यह जल भंडारण ढांचा स्थानीय लोगों के बीच ‘बीत का बुर्ज खलीफा’ नाम से पहचान बना रहा है।
लंबे पिलरों पर खड़ा यह टैंक न केवल क्षेत्र की बदलती तस्वीर को दर्शाता है, बल्कि जल भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण ढांचा है।
ग्राम पंचायत छेत्रां के पूर्व प्रधान विकास राणा इसे क्षेत्र में बढ़ी जल सुविधाओं से जोड़ते हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में पानी की कमी दूर करने के लिए लगातार काम हुआ है और अमराली का यह विशाल टावर उसी बदलाव का उदाहरण है।
25 लाख लीटर पानी की क्षमता
करीब 12.59 करोड़ रुपये की लागत से तैयार अमराली जल टैंक में एक साथ 25 लाख लीटर पानी संग्रहित किया जा सकता है। यह टैंक बीत क्षेत्र के 11 गांवों की करीब 27,215 आबादी की जलापूर्ति व्यवस्था को सहारा देगा। जल शक्ति विभाग के अनुसार ट्यूबवेल स्रोतों से प्राप्त पानी को इस टैंक में संग्रहित किया जाएगा और जरूरत के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में इसकी आपूर्ति की जाएगी।
अमराली के इस टावर की कुल ऊंचाई करीब 34 मीटर यानी 111 फीट 6 इंच है। इसमें करीब 25 मीटर यानी 82 फीट की स्टेजिंग और करीब 9 मीटर यानी 29 फीट 6 इंच ऊंचा कंटेनर शामिल है। टैंक को ऊंचाई पर बनाए जाने का उद्देश्य पानी को संग्रहित कर आवश्यकता के अनुसार नीचे स्थित गांवों तक पहुंचाना है।
हरोली क्षेत्र में कई बड़े जल भंडारण टैंक
अमराली का यह जल टैंक हरोली क्षेत्र में तैयार किए गए बड़े जल भंडारण ढांचों में शामिल है। पोलियां में 50 लाख लीटर और दुलैहड़ में 25 लाख लीटर क्षमता वाले टैंक भी बनाए गए हैं। इसके अलावा क्षेत्र में अलग-अलग क्षमता के करीब 75 टैंक तैयार किए जा चुके हैं।
गांवों में पानी की मांग पूरे साल एक जैसी नहीं रहती। गर्मियों में पानी की जरूरत बढ़ने के साथ आबादी और घरों की संख्या बढ़ने से भी जलापूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में जल स्रोतों के साथ पर्याप्त भंडारण क्षमता होना जरूरी है। अमराली का टैंक इसी जरूरत को पूरा करने में मदद करेगा।
11 गांवों की 27,215 आबादी को मिलेगा लाभ
जल शक्ति विभाग हरोली के अधिशासी अभियंता पुनीत शर्मा के अनुसार, इस परियोजना से बीत क्षेत्र के 11 गांवों की करीब 27,215 आबादी लाभान्वित होगी। ट्यूबवेल स्रोतों से पानी लेकर उसे टैंक में संग्रहित किया जाएगा और जरूरत के अनुसार आगे आपूर्ति की जाएगी।
पेयजल के साथ सिंचाई सुविधाओं पर भी जोर
हरोली का बीत क्षेत्र लंबे समय तक पानी की चुनौती से जुड़ा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल के साथ-साथ सिंचाई की जरूरत भी महत्वपूर्ण रही है। क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ बीत क्षेत्र में नकदी फसलों की खेती को भी बढ़ावा मिला है।
अमराली का यह विशाल जल टैंक इसी बदलती तस्वीर का एक प्रमुख हिस्सा है। सड़क से गुजरते लोगों को इसकी 111 फीट से अधिक ऊंचाई आसानी से दिखाई देती है, लेकिन इसकी वास्तविक उपयोगिता उन गांवों में महसूस होगी, जहां इसकी 25 लाख लीटर जल भंडारण क्षमता जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत आधार देगी।
स्थानीय लोगों का ‘बीत का बुर्ज खलीफा’ नाम दिया गया यह टावर आज क्षेत्र की पहचान बन रहा है। इसकी भौतिक ऊंचाई के साथ इसका महत्व उन 11 गांवों की जल जरूरतों से भी जुड़ा है, जिन्हें इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।
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