शिमला।
हिमाचल प्रदेश के करीब 28 लाख बिजली उपभोक्ताओं पर एक और आर्थिक बोझ बढ़ गया है। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड ने मार्च 2026 में उपयोग की गई बिजली पर 33.8 पैसे प्रति यूनिट की दर से ईंधन एवं बिजली खरीद समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) यानी फ्यूल चार्ज लागू कर दिया है।
इसकी वसूली जून माह में जारी बिजली बिलों के माध्यम से शुरू कर दी गई है। बिजली बोर्ड के आदेशों के अनुसार यह शुल्क राज्य विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ विनियमों के तहत लगाया गया है।
मार्च माह के लिए बिजली खरीद और ईंधन लागत के आकलन के बाद प्रति यूनिट 33.8 पैसे अतिरिक्त वसूली को मंजूरी दी गई है। इसका असर घरेलू, व्यावसायिक और अन्य सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
फ्यूल चार्ज लागू होने से घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिलों में 50 से 150 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। बिजली बोर्ड मुख्यालय ने सभी फील्ड इकाइयों को नियामक आयोग के आदेशों के अनुरूप इस शुल्क की वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।
बिजली बोर्ड के प्रबंध निदेशक आदित्य नेगी ने स्पष्ट किया है कि यह किसी नई बिजली दर वृद्धि का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि बिजली खरीद और ईंधन लागत में आए अंतर के समायोजन के लिए नियामक प्रावधानों के तहत यह शुल्क लगाया गया है। आगामी महीनों में फ्यूल चार्ज जारी रहेगा या नहीं, इसे लेकर आयोग के समक्ष याचिका दायर की गई है।
क्या है फ्यूल चार्ज?
फ्यूल चार्ज वह अतिरिक्त राशि होती है, जिसे बिजली उत्पादन और खरीद पर आने वाली वास्तविक लागत तथा निर्धारित लागत के बीच अंतर को समायोजित करने के लिए वसूला जाता है। जब बिजली खरीद या ईंधन पर अनुमान से अधिक खर्च होता है तो नियामक आयोग की मंजूरी के बाद उसका कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं से लिया जाता है।
पहले से कई शुल्कों का बोझ
प्रदेश के बिजली उपभोक्ता पहले ही स्वच्छता सेस, विभिन्न उपकर और अन्य शुल्कों का भुगतान कर रहे हैं। वहीं बिजली सब्सिडी के दायरे में भी बदलाव किए जा चुके हैं। ऐसे में फ्यूल चार्ज लागू होने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ने की संभावना है।