3.50 लाख रुपये लेने के बाद छह साल तक नहीं दी डिग्री, अदालत के आदेश पर पुलिस ने शुरू की जांच; कई और छात्रों के प्रभावित होने की आशंका
राजधानी शिमला में होटल मैनेजमेंट कोर्स और डिग्री देने के नाम पर कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने संजौली स्थित एक निजी संस्थान के संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले में छात्र ने आरोप लगाया है कि कोर्स पूरा होने के बावजूद उसे डिग्री और डिप्लोमा नहीं दिया गया। करीब 3.50 लाख रुपये लेने के बाद भी छह साल तक छात्र डिग्री के लिए संस्थान के चक्कर लगाता रहा।
पुलिस ने संस्थान के चेयरमैन, समन्वयक और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाजी सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
कई अन्य छात्रों के प्रभावित होने की आशंका
पुलिस को आशंका है कि इसी तरह होटल मैनेजमेंट कोर्स के नाम पर अन्य विद्यार्थियों के साथ भी धोखाधड़ी की गई हो सकती है। पुलिस अब मामले की जांच के साथ-साथ ऐसे अन्य छात्रों की जानकारी भी जुटा रही है, जो इस संस्थान से जुड़े रहे हैं।
बताया जा रहा है कि संबंधित संस्थान कुछ समय पहले बंद हो चुका है।
2017 में लिया था होटल मैनेजमेंट में दाखिला
शिकायतकर्ता प्रियव्रत मौदगिल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वर्ष 2017 में 12वीं कक्षा पास करने के बाद उन्होंने होटल मैनेजमेंट कोर्स करने का निर्णय लिया था।
इसी दौरान संस्थान के समन्वयक और सेंटर हेड ने उनसे संपर्क किया और संस्थान के बारे में जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि संस्थान से मिलने वाली डिग्री यूजीसी से मान्य होगी।
इसके बाद संस्थान की ओर से उनकी मां अमिता शर्मा को भी कोर्स और डिग्री को लेकर आश्वासन दिए गए। इन बातों पर विश्वास करते हुए प्रियव्रत ने अक्टूबर 2017 में संजौली स्थित संस्थान में दाखिला लिया।
फीस के नाम पर लिए गए 3.50 लाख रुपये
शिकायत के अनुसार संस्थान ने तीन वर्षीय बीएससी होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग साइंस कोर्स की फीस 1.74 लाख रुपये बताई थी।
इसके अलावा अतिरिक्त शुल्क, डिप्लोमा फीस और परीक्षा शुल्क मिलाकर कुल करीब 3.50 लाख रुपये लिए गए। परिवार ने इसके लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 2.94 लाख रुपये का एजुकेशन लोन लिया, जिसकी राशि सीधे संस्थान के खाते में जमा की गई। बाकी रकम नकद देने का आरोप है।
कोर्स पूरा होने के बाद भी नहीं मिली डिग्री
प्रियव्रत का आरोप है कि वर्ष 2020 में कोर्स पूरा होने के बाद भी उन्हें मूल मार्कशीट, डिग्री और डिप्लोमा उपलब्ध नहीं करवाया गया।
उन्हें केवल तमिलनाडु के एक विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की अस्थायी मार्कशीट दी गई। इसके बाद वह लगातार संस्थान प्रबंधन से डिग्री की मांग करते रहे, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिलते रहे।
कैंपस बंद मिला, फिर भी मिलते रहे आश्वासन
शिकायतकर्ता के अनुसार वर्ष 2023 में जब वह संजौली स्थित कैंपस पहुंचे तो वहां परिसर खाली मिला। उन्हें जानकारी मिली कि संस्थान का कार्यालय भट्ठाकुफर शिफ्ट कर दिया गया है।
वहां संपर्क करने पर भी उन्हें जल्द डिग्री जारी करने का भरोसा दिया गया, लेकिन इसके बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ।
अदालत के आदेश के बाद दर्ज हुई एफआईआर
प्रियव्रत ने आरोप लगाया कि कई बैच के छात्रों के साथ इसी तरह की समस्या हुई है। उन्होंने पहले पुलिस में शिकायत दी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर अदालत का रुख किया।
स्थानीय अदालत ने हाल ही में सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। इसके बाद ढली थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अब संस्थान के दस्तावेजों, फीस रिकॉर्ड और अन्य छात्रों से जुड़ी जानकारी की जांच कर रही है।
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