ऊना।
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने न केवल देवभूमि की छवि को धूमिल किया है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी झकझोर कर रख दिया है। पवित्र 'कंजक पूजन' (कन्या पूजन) के नाम पर एक व्यक्ति द्वारा तीन साल की मासूम बच्ची के साथ गलत हरकतें करने का मामला प्रकाश में आया है।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को नामजद कर जांच तेज कर दी है।
घटना का पूरा विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना ऊना के एक ग्रामीण क्षेत्र की है। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर, जब घरों में कन्याओं को देवी का रूप मानकर पूजा जाता है, आरोपी ने इसी परंपरा की आड़ ली। आरोपी ने पड़ोस में रहने वाली तीन वर्षीय मासूम बच्ची को 'कंजक जिमाने' (भोजन कराने) के बहाने अपने घर बुलाया।
बच्ची के परिजनों को लगा कि पड़ोस का मामला है और धार्मिक अनुष्ठान है, इसलिए उन्होंने उसे भेज दिया। लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी जब बच्ची घर नहीं लौटी, तो माँ उसे देखने आरोपी के घर की ओर गई।
घर लौटते ही बच्ची ने बयां किया दर्द
जब बच्ची घर वापस आई, तो वह काफी डरी और सहमी हुई थी। उसने रोते हुए अपनी माँ को शरीर में हो रहे तेज दर्द और आरोपी द्वारा की गई घिनौनी हरकतों के बारे में बताया। मासूम की बातें सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया और बच्ची को उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल पहुँचाया।
पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी धाराएं
पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपी के खिलाफ लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) की कड़ी धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
बच्ची का मेडिकल परीक्षण करवाया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद केस में और भी पुख्ता सबूत शामिल किए जाएंगे। पुलिस की एक टीम ने आरोपी के घर का दौरा किया है ताकि वहां से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा सकें।
मामला अत्यंत संवेदनशील है। हमने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बच्चों के विरुद्ध ऐसे अपराधों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कड़ी सजा सुनिश्चित की जाएगी।
क्षेत्र में तनाव और आक्रोश
इस घटना के बाद से पूरे इलाके में गहरा आक्रोश है। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए आरोपी को फांसी या कठोरतम दंड देने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर आस्था और विश्वास के इन आयोजनों में भी बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, तो यह समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
जागरूकता की अपील
इस घटना ने एक बार फिर अभिभावकों को सचेत रहने की याद दिलाई है। पुलिस प्रशासन और बाल कल्याण समितियों ने अपील की है कि बच्चों को कभी भी अनजान या अकेले किसी के घर न भेजें और उन्हें 'गुड टच-बैड टच' के बारे में जागरूक करें।