सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी में राहुल सांकृत्यायन की जयंती पर विद्वत संगोष्ठी का आयोजन

सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी में राहुल सांकृत्यायन की जयंती पर विद्वत संगोष्ठी का आयोजन
सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी में राहुल सांकृत्यायन की जयंती पर विद्वत संगोष्ठी का आयोजन

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मंडी।

सरदार पटेल विश्वविद्यालय (SPU) मंडी के इतिहास विभाग द्वारा महान यायावर, बहुभाषाविद् एवं प्रख्यात साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन की जयंती के उपलक्ष्य में एक विशेष विद्वत संगोष्ठी एवं अनुभव-साझा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को सांकृत्यायन के बौद्धिक योगदान और भारतीय इतिहास लेखन में उनके महत्त्व से रू-ब-रू करवाया गया।

विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने संदेश में कहा कि राहुल सांकृत्यायन का जीवन इस बात का प्रमाण है कि ज्ञान केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है।

उन्होंने कहा कि सतत यात्रा, अनुभव और जिज्ञासा ही ज्ञान को समृद्ध करती है। कुलपति ने ग्वालियर शैक्षणिक भ्रमण से लौटे विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने अनुभवों को लिपिबद्ध करें और उन्हें प्रकाशन योग्य रूप में प्रस्तुत करें।

मुख्य वक्ता एवं छात्र कल्याण अधिष्ठाता आचार्य राजेश कुमार शर्मा ने राहुल सांकृत्यायन के दार्शनिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके द्वारा लिखे गए यात्रा-वृत्तांत केवल साहित्य नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक अध्ययन के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सांकृत्यायन की ज्ञानमीमांसा से प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित किया।

इतिहास विभाग के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक राकेश कुमार शर्मा ने राहुल सांकृत्यायन के जीवन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया राहुल सांकृत्यायन का जन्म 9 अप्रैल 1893 को आजमगढ़ में हुआ था और उनका मूल नाम केदारनाथ पांडेय था।

वे हिंदी, संस्कृत, पाली और तिब्बती जैसी भाषाओं के प्रकांड विद्वान थे और उन्होंने 100 से अधिक ग्रंथों की रचना की। राकेश शर्मा ने सांकृत्यायन की मंडी यात्रा के संस्मरण साझा करते हुए बताया कि उनके प्रभाव से ही मंडी में पुरातत्व संरक्षण और साहित्य सृजन को नई दिशा मिली थी।

इस संगोष्ठी में ग्वालियर शैक्षणिक भ्रमण में शामिल रहे विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। सानू कुमार, दीपक, दीपांशु, नीरज, कल्पना, खुशबू, गौरव, शिव कुमार, लखविंदर, मनीषा सहित शोधार्थी वेद, राहुल और डोल्मा ने ग्वालियर की ऐतिहासिक धरोहरों के अध्ययन को ज्ञानवर्धक बताया।

विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे अपने इन अनुभवों को व्यवस्थित रूप से लिपिबद्ध कर शैक्षणिक साहित्य के रूप में विकसित करेंगे।कार्यक्रम के अंत में डॉ. रामपाल ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विभाग के अन्य शिक्षक और भारी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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