शिमला।
राजधानी शिमला के समरहिल क्षेत्र में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण का एक बड़ा मामला सामने आया है। पिछले साल शिव बावड़ी त्रासदी के बाद करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई सुरक्षा दीवार (Retaining Wall) मात्र एक साल के भीतर ही ढह गई है।
इस घटना ने न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) के हजारों छात्रों की जान को भी जोखिम में डाल दिया है।
गौरतलब है कि अगस्त 2023 में समरहिल के शिव बावड़ी में हुए भीषण भूस्खलन के बाद इस पूरे क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए एक भव्य संरचना (Structure) का निर्माण किया गया था। सरकार और संबंधित विभाग ने दावा किया था कि यह नई दीवार भविष्य में होने वाले भूस्खलन को रोकने में सक्षम होगी। हालांकि, मानसून से पहले की मामूली हलचल ने ही इन दावों की पोल खोल दी है।
दीवार गिरने का यह समय सबसे अधिक चिंताजनक है क्योंकि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्नातक (UG) परीक्षाएं चल रही हैं। रोजाना हजारों की संख्या में छात्र परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। दीवार के ध्वस्त होने से मुख्य मार्ग और पैदल रास्तों के नीचे की जमीन खोखली हो गई है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय निवासियों और छात्र संगठनों का आरोप है कि इस दीवार के निर्माण में मानक सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद संरचना का एक साल भी न टिक पाना सीधे तौर पर विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
दीवार गिरने के बाद क्षेत्र में डर का माहौल है। छात्रों और अभिभावकों ने मांग की है कि परीक्षाओं के मद्देनजर इस क्षेत्र की तुरंत फेंसिंग की जाए और दोषियों के खिलाफ जांच बैठाई जाए। अभी तक इस मामले में संबंधित विभाग के किसी बड़े अधिकारी का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।