सोलन।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल के निर्वाचन क्षेत्र से सटे छौशा गांव में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव से त्रस्त ग्रामीणों का धैर्य मंगलवार को जवाब दे गया।
आक्रोशित ग्रामीणों ने एकत्र होकर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले चुनावों में सरकार को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में 37 साल पहले यहाँ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) खोला गया था।
लेकिन आज विडंबना यह है कि अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पास के सायरी अस्पताल में 9 डॉक्टर तैनात हैं, फिर भी छौशा PHC के डॉक्टरों की ड्यूटी बार-बार डेपुटेशन पर दूसरी जगहों पर लगा दी जाती है। डॉक्टर न होने के कारण ग्रामीणों को इलाज के लिए सोलन, कंडाघाट या शिमला के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे आर्थिक और शारीरिक शोषण हो रहा है।
केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि शिक्षा और पानी के मुद्दे पर भी ग्रामीणों ने सरकार को घेरा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रविवार के दिन गांव में पानी की सप्लाई बंद कर दी जाती है, जिससे दैनिक कार्य ठप हो जाते हैं।
तहसील के कार्यों के लिए कंडाघाट के बजाय अब ग्रामीणों को ममलीघ जाना पड़ रहा है, जो उनके साथ सीधे तौर पर नाइंसाफी है। स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं और इस रूट पर चलने वाली सरकारी बसें अक्सर बीच रास्ते में खराब हो जाती हैं, जिससे छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को भारी परेशानी होती है।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने दो-टूक शब्दों में कहा कि छौशा गांव के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है। हमने कई बार प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन अब तक आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।
यदि स्वास्थ्य केंद्र में पक्के तौर पर डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हुई और पानी-सड़क की समस्या हल नहीं हुई, तो हम जनांदोलन शुरू करेंगे। चुनावों में वोट की चोट से इसका जवाब दिया जाएगा।