शिमला।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में कमर्शियल और घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की अनियमित आपूर्ति ने शहर के किचन का बजट और तरीका दोनों बदल दिया है। गैस की किल्लत और सिलेंडर मिलने में हो रही देरी के कारण अब लोग 'वैकल्पिक ऊर्जा' की ओर रुख कर रहे हैं।
यही कारण है कि शिमला के इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों में इंडक्शन चूल्हों और इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग में अचानक भारी उछाल दर्ज किया गया है।
शिमला के प्रमुख व्यापारियों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में इंडक्शन चूल्हों की बिक्री ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन चूल्हों की मांग में 70 से 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
लोग अब बैकअप के तौर पर इंडक्शन को पहली पसंद बना रहे हैं। इसके साथ ही इंडक्शन फ्रेंडली स्टील के बर्तनों की मांग भी बढ़ गई है। नेहर सिंह शर्मा (दुकानदार) पहले सप्ताह में मुश्किल से एक या दो इंडक्शन बिकते थे, लेकिन अब आलम यह है कि अकेले आज ही मैंने 8 इंडक्शन चूल्हे बेचे हैं। मांग इतनी ज्यादा है कि कुछ मॉडल्स का स्टॉक भी खत्म होने लगा है।
सिर्फ घरेलू उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि गैस किल्लत से जूझ रहे होटल, ढाबा और रेस्तरां संचालक भी अब इलेक्ट्रिक कुकिंग की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। भारी काम के लिए इंफ्रारेड (Infrared) और हाई-पावर इंडक्शन की मांग कमर्शियल सेगमेंट में सबसे ज्यादा देखी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि गैस की अनिश्चितता के कारण लोग अब बिजली पर निर्भर होना सुरक्षित मान रहे हैं।
एलपीजी की कमी और बढ़ती कीमतों पर अब राजनीति भी गरमा गई है। हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष छत्र सिंह ने केंद्र सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों और गलत आयात नीतियों के कारण आम आदमी पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऊर्जा संसाधनों के प्रबंधन में केंद्र की विफलता का खामियाजा अब हिमाचल के व्यवसायों और परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।