नाहन।
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला में अवैध कटान के बाद अब सड़क निर्माण के नाम पर होने वाले पेड़ों के कटान ने तूल पकड़ लिया है। नाहन के समीप ग्राम पंचायत अजोली में प्रस्तावित एक संपर्क मार्ग के लिए 70 से अधिक हरे-भरे पेड़ों को काटने की प्रशासनिक अनुमति के विरोध में स्थानीय ग्रामीण,
विशेषकर महिलाओं ने प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने पेड़ों की सुरक्षा के लिए उन पर रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें न काटने का संकल्प लिया है।
हाल ही में शिलाई क्षेत्र में 25 पेड़ों की अनुमति की आड़ में 300 से अधिक पेड़ काटने का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अजोली पंचायत में 70 पेड़ों की बलि देने की तैयारी ने आग में घी डालने का काम किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन पर्यावरण की अनदेखी कर रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत अजोली से घुमंतू गुर्जरों की बस्ती जम्बुखाला के लिए जिस नए मार्ग का प्रस्ताव भेजा गया है, उसकी कोई आवश्यकता नहीं है। मुगलावाला करतारपुर पंचायत से जम्बुखाला के लिए पहले से ही एक मार्ग बना हुआ है, जो राजस्व रिकॉर्ड में भी दर्ज है।
यदि पुराने मार्ग को ही पक्का कर दिया जाए, तो एक भी पेड़ काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर वन विभाग और संबंधित प्रशासन किसके दबाव में आकर नए मार्ग के नाम पर 70 पेड़ों की बलि देना चाहता है।
दशकों से पुराने मार्ग का उपयोग हो रहा है। नए मार्ग का प्रस्ताव केवल कुछ लोगों के स्वार्थ और ठेकेदारी प्रथा को लाभ पहुँचाने के लिए भेजा गया है। ये पेड़ हमारे बच्चों के समान हैं। हम इन्हें कटने नहीं देंगे। अगर प्रशासन ने जबरन कटान शुरू किया, तो हम उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।
जम्बुखाला बस्ती तक सड़क बनाने के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने का यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय महिलाओं द्वारा पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधना इस बात का संकेत है कि ग्रामीण इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।