कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान के कलाकारों को दशहरा कमेटी ने किया सम्मानित, कलाकारों ने भी विधायक सुंदर सिंह ठाकुर को भेंट किए अपने देशों के उपहार
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में भारत और मध्य एशिया के बीच सांस्कृतिक मित्रता की झलक देखने को मिली। उत्सव में अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करने वाले कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान के कलाकारों की विदाई का अवसर भावुक हो गया।
दशहरा उत्सव कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक सुंदर सिंह ठाकुर विदेशी मेहमानों को विदाई देते समय भावुक नजर आए। इस दौरान उन्होंने कलाकारों को सम्मानित किया और उत्सव में उनकी सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया। वहीं, विदेशी कलाकारों ने भी सुंदर सिंह ठाकुर को अपने-अपने देशों के उपहार भेंट किए।
सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान से आए कलाकार अब अपने घर लौट रहे हैं। उत्सव के दौरान उनके साथ कई दिन बिताने से एक पारिवारिक रिश्ता बन गया है।
उन्होंने कहा कि विदेशी मेहमानों के साथ बिताए गए पल हमेशा यादगार रहेंगे। इन कलाकारों की भागीदारी से अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव की पहचान और मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से विभिन्न देशों के बीच आपसी समन्वय, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मित्रता को बढ़ावा मिलता है।
विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच पुराने ऐतिहासिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में सिल्क रूट के माध्यम से व्यापार और आपसी संपर्क के रिश्ते कायम हुए थे। इसके अलावा हिंदी सिनेमा के प्रति इन देशों के लोगों का लगाव भी दोनों क्षेत्रों की संस्कृतियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सुंदर सिंह ठाकुर ने बताया कि कुल्लू दशहरा समिति भविष्य में कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान के साथ सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है।
इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संबंधों को आगे बढ़ाना और भविष्य में विदेशी कलाकारों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। कुल्लू दशहरा उत्सव के माध्यम से विभिन्न देशों की संस्कृतियों को एक मंच पर लाने और आपसी मित्रता को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
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