घेपन ग्लेशियल झील के बढ़े जलस्तर से संभावित आपदा जोखिम को देखते हुए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की अध्यक्ष किरण भड़ाना पहली महिला आईएएस अधिकारी हैं, जो स्वयं लगभग 14 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई कर घेपन झील तक पहुंचीं।
उन्होंने झील के जलस्तर, आसपास के ग्लेशियरों, भू-भाग और संभावित पानी के बहाव मार्ग का मौके पर निरीक्षण किया।
डीसी किरण भड़ाना ने कहा कि घेपन झील के आसपास बड़ी संख्या में ग्लेशियर और ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र हैं। ऐसे क्षेत्रों की स्थिरता की नियमित वैज्ञानिक निगरानी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि नेपाल में पिछले माह हुई त्रासदी ने ग्लेशियरों की अस्थिरता से जुड़े संभावित खतरों की गंभीरता को सामने रखा है। ऐसे में घेपन झील क्षेत्र की निगरानी के लिए एसडीएमए और एनडीएमए के साथ समन्वय कर वैज्ञानिक आकलन और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
पांच मिनट में आबादी तक पहुंच सकता है पानी
किरण भड़ाना ने कहा कि अब तक के विभिन्न आकलनों में यह सामने आया है कि आपदा की स्थिति में झील से पानी अचानक नीचे आने पर लगभग 22 मिनट में आबादी वाले क्षेत्र तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि, स्थल की वास्तविक भौगोलिक एवं व्यावहारिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन का आकलन है कि पानी करीब पांच मिनट में भी आबादी वाले क्षेत्र तक पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि संभावित जोखिम को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों के लिए प्रभावी निकासी योजना, नियमित मॉक ड्रिल, जनजागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की स्पष्ट व्यवस्था संभावित नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
घेपन झील में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की तैयारी
डीसी ने बताया कि घेपन झील में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है। इसका उद्देश्य जलस्तर सहित अन्य महत्वपूर्ण मानकों की लगातार निगरानी करना और संभावित खतरे की स्थिति में वास्तविक समय में चेतावनी उपलब्ध करवाना है।
उन्होंने बताया कि सी-डैक (C-DAC), तिरुवनंतपुरम की ओर से विकसित प्रणाली का सिस्सू झील में परीक्षण भी किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में तेजी से बदलती प्राकृतिक परिस्थितियों को देखते हुए पूर्व तैयारी, निरंतर निगरानी, वैज्ञानिक आकलन और विभागों के बीच बेहतर समन्वय आपदा जोखिम कम करने के महत्वपूर्ण आधार हैं।
10 विभागों की 15 सदस्यीय टीम पहुंची झील तक
निरीक्षण के लिए करीब 10 विभागों के 15 अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम भी घेपन झील तक पहुंची। टीम में परियोजना अधिकारी आईटीडीपी अश्वनी कुमार शर्मा, उप वन क्षेत्रपाल लीला मणि, चिकित्सा अधिकारी डॉ.
सुषमा और डॉ. विक्रांत नेगी, बीआरओ 94 आरसीसी के प्रभारी कैप्टन हरिओम शरण, अग्निशमन केंद्र केलांग के प्रभारी रतन चंद, होमगार्ड फायरमैन छेरिंग आंगरुप, आईटीडीपी के कनिष्ठ कार्यालय सहायक अजीत सिंह, जल शक्ति विभाग के कनिष्ठ अभियंता पंकज महाजन, पंप अटेंडेंट अरविंद कुमार,
एचपीएसईबीएल के वरिष्ठ सहायक संजय कुमार व कनिष्ठ सहायक रोबिन, वन रक्षक बलवीर सिंह तथा उपायुक्त के निजी सुरक्षा अधिकारी ईश्वर दास शामिल रहे।
अत्यधिक दुर्गम क्षेत्र होने के कारण टीम के अन्य सदस्यों के लिए झील के नीचे बेस कैंप में रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई। उपायुक्त निरीक्षण के बाद मंगलवार को ही वापस लौट आईं, जबकि टीम के अन्य सदस्य बुधवार दोपहर बाद केलांग लौटे।
follow us on facebook
subscribe to us on youtube