मंडी
मंडी जनपद के सुप्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल पराशर में आयोजित 'काशी मेल क्रिकेट ट्रॉफी 2026' विवादों की भेंट चढ़ गई है। खेल भावना को ताक पर रखकर लिए गए आयोजकों के एक फैसले ने न केवल खिलाड़ियों का दिल तोड़ा, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं में भारी रोष पैदा कर दिया है। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि मुख्य अतिथि को बिना कार्यक्रम में शामिल हुए ही बैरंग लौटना पड़ा।
पराशर ऋषि के मंदिर के समीप मैदान में चल रही इस प्रतियोगिता में उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब टूर्नामेंट के नियमों को ताक पर रखकर सेमीफाइनल मैचों को ही दरकिनार कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक, शेगली और टिहरी की टीमें अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर अजेय रहते हुए सेमीफाइनल में पहुंची थीं।
नियमों के अनुसार इन दोनों टीमों के बीच मुकाबला होना तय था, लेकिन खिलाड़ियों के होश तब उड़ गए जब आयोजकों ने सीधे फाइनल मैच की घोषणा कर दी। आरोप है कि आयोजकों ने अपनी मनपसंद टीम (आयोजनकर्ता की टीम) को सीधे फाइनल में प्रवेश दिलाने के लिए यह सारा प्रपंच रचा।
टिहरी टीम के कप्तान कमलकांत और शेगली टीम के कप्तान श्रवण ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है यह खिलाड़ियों के साथ खुला अन्याय है। जब हम मेहनत करके सेमीफाइनल तक पहुंचे, तो हमें खेलने का मौका क्यों नहीं दिया गया? ऐसा लगता है कि यह आयोजन खेल के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ पैसों की बंदरबांट और अपनी टीम को जिताने के लिए किया जा रहा है।
विरोध इतना जबरदस्त था कि दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने खेल भावना के अपमान का आरोप लगाते हुए बिना मैच खेले ही मैदान छोड़ दिया। इस विवाद की गूँज तब और बढ़ गई जब कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भीम चंद ठाकुर आयोजन स्थल पर पहुंचे। वहां के बिगड़े हालात और खिलाड़ियों के आक्रोश को देखते हुए उन्होंने मैदान के अंदर प्रवेश करना भी उचित नहीं समझा और वहीं से वापस लौट गए।
स्थानीय युवाओं ने अब चेतावनी दी है कि भविष्य में इस तरह की पक्षपातपूर्ण प्रतियोगिताओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना ने मंडी के स्थानीय खेल आयोजनों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या खेल संघ या प्रशासन इस तरह के मनमाने आयोजनों पर कोई संज्ञान लेता है या नहीं।