सोलन।
हिमाचल प्रदेश के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब जोगिंद्रा केंद्रीय सहकारी बैंक, सोलन में पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सामने आए।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने बैंक के प्रबंध निदेशक पंकज सूद, निदेशक मंडल और सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार (RCS) शिमला पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए इस पूरी प्रक्रिया को 'संगठित भ्रष्टाचार' करार दिया है।
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2022 में विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) के माध्यम से उन अधिकारियों को प्रमोट किया गया, जो वित्तीय धोखाधड़ी और गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्त थे। आरोप है कि अब मार्च 2026 में भी उसी तर्ज पर उन अधिकारियों को पदोन्नति देने की तैयारी है, जिनके विरुद्ध विजिलेंस जांच और FIR लंबित हैं।
कुलदीप सिंह (AGM), राम पाल (AGM), हरीश शर्मा और गुरमीत सिंह जैसे अधिकारियों पर करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं, फर्जी ऋण वितरण और NPA छिपाने के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि राम पाल और कुलदीप सिंह दो FIR मामलों में जमानत पर हैं और उनके मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं,
इसके बावजूद उन्हें उच्च पदों पर पदोन्नत किया जा रहा है। आरोप है कि कुलदीप सिंह ने एमडी पंकज सूद के साथ सांठगांठ कर DPC कमेटी में अपने पसंदीदा डायरेक्टर्स को नामित करवाया है ताकि उन्हें 'क्लीन चिट' मिल सके।
अधिवक्ता शर्मा का दावा है कि प्रभावशाली अधिकारियों को लाभ पहुँचाने के लिए बैंक के ईमानदार और पात्र कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टियों (ACR) के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई ताकि वे दौड़ से बाहर हो जाएं।
मामला तब और गंभीर हो गया जब यह पता चला कि अधिवक्ता द्वारा 14 जनवरी 2026 को रजिस्ट्रार सहकारिता शिमला को भेजे गए विस्तृत विधिक नोटिस (Legal Notice) का आज तक कोई जवाब नहीं दिया गया। आरोप है कि विभाग जानबूझकर तथ्यों को दबाने और दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहा है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा DPC प्रक्रिया की समीक्षा के लिए दिए गए निर्देशों का वर्षों से पालन नहीं किया गया। वर्तमान में चल रही पदोन्नति प्रक्रिया (मार्च 2026) को रोकने और पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग उठने लगी है।