कसौली
भारतीय सेना ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और राष्ट्रीय एकता के संदेश के साथ शुक्रवार सुबह कसौली छावनी से ‘सूर्य ग्रीन-हिमालयन ओडिसी’ इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अभियान का शानदार आगाज किया।
भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने इस अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। टाटा ईवी के सहयोग और सूर्य कमांड के मार्गदर्शन में गोल्डन की डिवीजन द्वारा आयोजित यह अभियान हरित व स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
टाटा के 10 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों (जिसमें छह टाटा हैरियर, तीन टाटा कर्व और एक टाटा पंच ईवी शामिल हैं) का यह काफिला 11 दिनों में हिमाचल और लद्दाख के बेहद दुर्गम, सीमावर्ती और सुदूर क्षेत्रों से होते हुए कुल 1,663 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण यात्रा पूरी करेगा, जिसका समापन 22 जून को लेह स्थित 'हॉल ऑफ फेम' में होगा।
दुनिया के सबसे ऊंचे दर्रों से गुजरेगा रूट और जांबाजों की होगी परीक्षा
गोल्डन की डिवीजन के मेजर अमन सिंह यादव के नेतृत्व में आगे बढ़ रहे इस दल में भारतीय सेना के 10 जवान, टाटा ईवी के पांच प्रतिनिधि और दो डिजिटल कंटेंट क्रिएटर शामिल हैं।
यह रोमांचकारी यात्रा स्पीति, लाहौल, हान्ले, चुशुल और तांग्त्से जैसे अत्यधिक कठिन भू-भागों से होकर गुजरेगी। इस दौरान काफिला दुनिया की कुछ सबसे ऊंची मोटरयोग्य सड़कों को पार करेगा, जिसमें 17,590 फीट की ऊंचाई पर स्थित चांग ला और 19,024 फीट की ऊंचाई पर स्थित विश्व का सबसे ऊंचा मोटरयोग्य दर्रा 'उमलिंग ला' शामिल हैं।
शून्य से नीचे के तापमान और कम ऑक्सीजन वाले इन क्षेत्रों में यह सफर मनुष्य और मशीन दोनों की असाधारण सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा लेगा। अपनी यात्रा के दौरान यह टीम ऐतिहासिक रेजांग ला युद्ध स्मारक पर जाकर वर्ष 1962 की लड़ाई में 13 कुमाऊं रेजिमेंट के वीर जवानों के अदम्य साहस व सर्वोच्च बलिदान को नमन भी करेगी।
स्वदेशी हरित तकनीक और सैन्य-नागरिक संबंधों को मिलेगी मजबूती
इस गौरवमयी अभियान का मुख्य उद्देश्य देश में स्वच्छ गतिशीलता, जिम्मेदार पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी हरित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही यह अभियान राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने, सैन्य-नागरिक संबंधों को मजबूत करने व भारतीय सेना के जवानों के शौर्य को उजागर करने का काम करेगा।
जागरूकता फैलाने के लिए यह टीम रास्ते में आने वाले पर्वतीय क्षेत्रों के स्थानीय समुदायों, युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों से सीधा संवाद भी करेगी। सेना के अधिकारियों के अनुसार, शून्य उत्सर्जन (Zero Emission) का संदेश देने वाला यह अनूठा अभियान स्वच्छ गतिशीलता और स्वदेशी हरित तकनीक को अपनाने के भारत सरकार के दृष्टिकोण के पूरी तरह अनुकूल है।