आधुनिक मस्तिष्क विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय पर चर्चा, संयुक्त शोध और शैक्षिक सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में शोध कर रहे डॉक्टोरल शोधार्थी मोहन पाण्डेय से वैदिकगण संस्था के संस्थापक अध्यक्ष वत्स देशराज शर्मा ने शिष्टाचार भेंट की।
इस अवसर पर भाषा विज्ञान, मस्तिष्क विज्ञान, पाणिनीय व्याकरण और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में आधुनिक वैज्ञानिक शोध और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच समन्वय को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
न्यूरोसाइंस और पाणिनीय व्याकरण के समन्वय पर शोध
मोहन पाण्डेय का शोध आधुनिक न्यूरोसाइंस और भारत की करीब 2500 वर्ष पुरानी पाणिनीय व्याकरण परंपरा के समन्वय पर आधारित है।
वह ईईजी (EEG) तकनीक के माध्यम से यह अध्ययन कर रहे हैं कि मानव मस्तिष्क ध्वनि को किस प्रकार ग्रहण करता है और उसे अर्थ में परिवर्तित करने की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है।
उनका शोध विशेष रूप से हिंदी और संस्कृत जैसी भारतीय भाषाओं के साथ-साथ विकासात्मक तंत्रिका विकारों से प्रभावित विद्यार्थियों में भाषा प्रक्रिया को समझने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य भाषावैज्ञानिक आधार पर नए शिक्षण तरीकों और सहायक उपकरणों के विकास में योगदान देना है।
भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने पर चर्चा
भेंट के दौरान वत्स देशराज शर्मा ने अपने द्वारा संपादित माधवमहिमा और ऋतुकाव्यम् ग्रंथ मोहन पाण्डेय को भेंट किए।
उन्होंने वैदिकगण संस्था की ओर से मोहन पाण्डेय के शोध और शैक्षिक कार्यों में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
वहीं मोहन पाण्डेय ने भी भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए वैदिकगण संस्था द्वारा किए जा रहे प्रयासों में सहयोग देने की बात कही।
संयुक्त शोध और अकादमिक सहयोग पर बनी सहमति
बैठक में यह विचार सामने आया कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान का समन्वय वर्तमान समय की आवश्यकता है।
इस दौरान भविष्य में संयुक्त शोध परियोजनाओं, शैक्षिक कार्यक्रमों और अकादमिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई।
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