मंडी I
जमीन के नीचे दबी गैस पाइपलाइन, बिजली के तार या अन्य बुनियादी ढांचों का पता लगाना अब सिरदर्द नहीं होगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक क्रांतिकारी एनसीएम (नॉन-कॉन्टैक्टिंग) सिस्टम विकसित किया है। यह डिवाइस बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप और बिना गड्ढा खोदे जमीन के भीतर 3.5 मीटर की गहराई तक सटीक जानकारी देने में सक्षम है।
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को आईआईटी मंडी के डॉ. नरेन, डॉ. अमित शुक्ला और उनकी टीम ने तैयार किया है। इस तकनीक की सटीकता का लोहा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी माना जा चुका है।
डॉ. शुक्ला ने इसका दुबई में गैस पाइपलाइनों की जांच के लिए सफल परीक्षण किया, जिसके परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं। अब उम्मीद जताई जा रही है कि भारत की बड़ी कंपनियां भी जल्द ही इस स्वदेशी तकनीक को अपनाएंगी।
वर्तमान में जमीन के नीचे की संरचनाओं की जांच पारंपरिक और मैनुअल तरीकों से की जाती है, जो काफी धीमी प्रक्रिया है। इंसानी मदद से एक दिन में अधिकतम 5 किलोमीटर तक का ही सर्वे हो पाता है।
यह सिस्टम बिना किसी इंसानी हस्तक्षेप के एक दिन में 15 से 20 किलोमीटर तक का क्षेत्र कवर कर सकता है। यह डिवाइस लगातार 8 घंटे तक काम कर सकती है और ऑपरेटर एक ही स्थान पर बैठकर रिमोटली इसकी निगरानी कर सकता है।
यह तकनीक केवल बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी सुरक्षा कवच साबित होगी नया घर बनाने वाले लोग अब नींव खोदने से पहले यह जान सकेंगे कि जमीन के नीचे कोई हाई-वोल्टेज बिजली का तार या संवेदनशील गैस पाइपलाइन तो नहीं है।
अनजाने में होने वाली खुदाई से अक्सर पाइपलाइन फटने या तार कटने की घटनाएं होती हैं, जिन्हें इस डिवाइस की मदद से टाला जा सकेगा। जमीन के नीचे 3.5 मीटर (लगभग 11.5 फीट) की गहराई तक मौजूद हर ढांचे का सटीक विवरण प्राप्त होगा।
आईआईटी मंडी का यह नवाचार न केवल "आत्मनिर्भर भारत" की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह शहरी विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाएगा। बिना तोड़-फोड़ के जमीन का एक्स-रे करने वाली यह तकनीक आने वाले समय में निर्माण क्षेत्र की पहली पसंद बन सकती है।