धर्मशाला।
पर्यटन नगरी धर्मशाला में नगर निगम चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। प्रत्याशी घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं, लेकिन शहर की जमीनी हकीकत दावों से कोसों दूर है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि चुनाव दर चुनाव चेहरे बदलते हैं, लेकिन पार्किंग, सीवरेज और पेयजल जैसी बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
धर्मशाला एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है, लेकिन यहाँ पार्किंग की कमी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। आलम यह है कि शहर की मुख्य सड़कों के एक तरफ वाहनों की लंबी लाइनें लगी रहती हैं, जिससे यातायात बाधित होता है। स्थानीय व्यापारी वरुण कुमार का कहना है कि "स्मार्ट सिटी का आभास तक नहीं होता। पार्किंग न होने से कारोबार और पर्यटन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।"
शहर के 'मर्ज एरिया' (नए शामिल क्षेत्र) अभी तक सीवरेज नेटवर्क से नहीं जुड़ पाए हैं। वहीं, पुराने शहर में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। हरीश संबयाल और अश्वनी कुमार ने आरोप लगाया कि कई जगहों पर सीवरेज टैंक बैठ चुके हैं और गंदगी सीधे नालियों व नालों में छोड़ी जा रही है।
कूहलों का पानी जो कभी साफ होता था, अब दूषित हो चुका है। लोगों की मांग है कि नालों में गंदगी फेंकने वालों पर जुर्माने की व्यवस्था होनी चाहिए।
कारोबारी राजेश शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "स्मार्ट सिटी के नाम पर शहरवासियों के साथ भद्दा मजाक किया गया है।" वहीं, कमलजीत सिंह राणा और सुरेंद्र कुमार धीमान ने बताया कि स्ट्रीट लाइट्स खराब हैं, सड़कों की दशा दयनीय है और शीला चौक जैसे प्रमुख स्थानों पर सार्वजनिक शौचालयों तक की व्यवस्था नहीं है।
पेयजल आपूर्ति को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग बरसात में 'पाइप बहने' का बहाना बनाता है और गर्मियों में 'पहाड़ों पर बर्फ कम होने' का। सुरेंद्र धीमान ने कहा कि पिछले कार्यकाल में कार्य संतोषजनक नहीं रहे, इसलिए इस बार जनता नई सोच वाले प्रत्याशियों की ओर देख रही है।
पार्षद जिस तरह वोट के लिए घर-घर हाथ जोड़कर आते हैं, उसी तरह चुनाव जीतने के बाद उन्हें समस्याओं पर भी गौर करना चाहिए। हम इस बार केवल वादों पर नहीं, बल्कि काम के आधार पर मतदान करेंगे।— धर्मशाला के जागरूक नागरिक