आईजीएमसी शिमला के शोध में बड़ा खुलासा: गर्भावस्था में लापरवाही से नवजातों में सेप्सिस का बढ़ता खतरा

आईजीएमसी शिमला के शोध में बड़ा खुलासा: गर्भावस्था में लापरवाही से नवजातों में सेप्सिस का बढ़ता खतरा
आईजीएमसी शिमला के शोध में बड़ा खुलासा: गर्भावस्था में लापरवाही से नवजातों में सेप्सिस का बढ़ता खतरा

Published:

453 नवजातों पर अध्ययन में 146 मामलों में संक्रमण की पुष्टि, विशेषज्ञों ने नियमित एंटीनेटल जांच, सुरक्षित प्रसव और कम वजन वाले शिशुओं की विशेष निगरानी की दी सलाह।

हिमाचल प्रदेश के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला के विशेषज्ञों द्वारा किए गए एक महत्वपूर्ण शोध में खुलासा हुआ है कि गर्भावस्था के दौरान नियमित चिकित्सीय जांच में लापरवाही, प्रसव के समय स्वच्छता की कमी और समय से पहले जन्म जैसे कारण नवजात शिशुओं में सेप्सिस (Neonatal Sepsis) का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।

समय पर पहचान और उपचार न मिलने पर यह संक्रमण नवजात के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है।

यह अध्ययन वर्ष 2023 से 2025 के बीच कमला नेहरू अस्पताल, शिमला में किया गया। शोध के निष्कर्ष हाल ही में वर्ल्ड जर्नल ऑफ क्लीनिकल पीडियाट्रिक्स में प्रकाशित हुए हैं। अध्ययन में 453 नवजात शिशुओं और उनकी माताओं को शामिल किया गया, जिनमें 146 बच्चों में सेप्सिस संक्रमण की पुष्टि हुई।

अध्ययन में क्या सामने आया?

शोध के अनुसार, संक्रमण से प्रभावित 65.8 प्रतिशत नवजात लड़के थे, जबकि लड़कियों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। प्रभावित बच्चों की औसत गर्भकालीन अवधि 36.5 सप्ताह दर्ज की गई, जो समय से पहले जन्म के बढ़ते जोखिम की ओर संकेत करती है।

अध्ययन में संक्रमित नवजातों में कई गंभीर लक्षण भी पाए गए। इनमें 37 प्रतिशत बच्चों में तेज सांस चलना, 32.9 प्रतिशत में छाती का अंदर की ओर धंसना, 13.7 प्रतिशत में सुस्ती, 14.4 प्रतिशत में पीलिया, 8.2 प्रतिशत में कुपोषण, 13.7 प्रतिशत में बुखार, 4.8 प्रतिशत में हाइपोथर्मिया,

8.2 प्रतिशत में एपनिया (सांस रुकना) और 6.8 प्रतिशत मामलों में दौरे देखे गए। वहीं 2.1 प्रतिशत बच्चों में जन्मजात विकृतियां भी दर्ज की गईं।

सेप्सिस के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों ने शोध में कई ऐसे कारणों की पहचान की है जो नवजातों में संक्रमण का जोखिम बढ़ाते हैं। इनमें शामिल हैं—

कैसे किया जा सकता है बचाव?

आईजीएमसी के विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर नवजातों में सेप्सिस के मामलों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए—

विशेषज्ञ की सलाह

शोधकर्ता एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मंगला सूद ने कहा कि सेप्सिस नवजातों में होने वाला एक गंभीर संक्रमण है, लेकिन गर्भावस्था और प्रसव के दौरान उचित देखभाल, नियमित जांच और स्वच्छता के मानकों का पालन कर इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

उन्होंने गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से नियमित चिकित्सकीय परामर्श लेने और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करने की अपील की।

follow us on facebook
subscribe to us on youtube

इस खबर के विषय

संबंधित खबरें

घवांडल पशु चिकित्सालय में पशु जन्म नियंत्रण शिविर, 15 कुत्तों की सफल नसबंदी

घवांडल पशु चिकित्सालय में पशु जन्म नियंत्रण शिविर, 15 कुत्तों की सफल नसबंदी

पशु चिकित्सालय घवांडल में आयोजित पशु जन्म नियंत्रण शिविर में 15 श्वानों की सफल शल्य चिकित्सा की गई। इनमें 7 मादा और 8 नर कुत्ते शामिल रहे। शिविर का उद्देश्य ...

पूरा पढ़ें (Read More) →
करंट लगने से इकलौते बेटे की मौत, दो महीने बाद भी परिवार की सुध लेने नहीं पहुंचा प्रशासन; चार बहनों और बुजुर्ग माता-पिता का था सहारा

करंट लगने से इकलौते बेटे की मौत, दो महीने बाद भी परिवार की सुध लेने नहीं पहुंचा प्रशासन; चार बहनों और बुजुर्ग माता-पिता का था सहारा

बिलासपुर के श्री नयना देवी जी क्षेत्र के भटेड गांव में करंट लगने से जान गंवाने वाले गुरमेल सिंह के परिवार ने प्रशासन पर सुध न लेने का आरोप लगाया है। परिवार क...

पूरा पढ़ें (Read More) →
13 नवंबर को मंडी में CM सुक्खू के नेतृत्व में निकलेगी एंटी चिट्टा जागरूकता वॉकथॉन, तैयारियों में जुटा प्रशासन

13 नवंबर को मंडी में CM सुक्खू के नेतृत्व में निकलेगी एंटी चिट्टा जागरूकता वॉकथॉन, तैयारियों में जुटा प्रशासन

हिमाचल को चिट्टे के नशे से मुक्त बनाने के उद्देश्य से 13 नवंबर को मंडी में एंटी चिट्टा जागरूकता वॉकथॉन प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू...

पूरा पढ़ें (Read More) →
बीबीएमबी मामले पर विक्रमादित्य सिंह बोले- वीरभद्र सिंह ने शुरू की थी हिमाचल के हक की लड़ाई, चंडीगढ़ में भी जारी रहेगी हिस्सेदारी की मांग

बीबीएमबी मामले पर विक्रमादित्य सिंह बोले- वीरभद्र सिंह ने शुरू की थी हिमाचल के हक की लड़ाई, चंडीगढ़ में भी जारी रहेगी हिस्सेदारी की मांग

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बीबीएमबी में हिमाचल की हिस्सेदारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि इस कानूनी लड़ाई क...

पूरा पढ़ें (Read More) →
BBMB मामले में हिमाचल को बड़ी जीत, हर साल 600 से 1000 करोड़ रुपये का होगा फायदा: हर्षवर्धन चौहान

BBMB मामले में हिमाचल को बड़ी जीत, हर साल 600 से 1000 करोड़ रुपये का होगा फायदा: हर्षवर्धन चौहान

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने BBMB मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को हिमाचल की बड़ी जीत बताया है। उनके अनुसार प्रदेश को 11,975 मिलियन यूनिट बिजली की बका...

पूरा पढ़ें (Read More) →

इससे पहले और बाद की खबरें