तिंदी-किलाड़ मार्ग पर पहाड़ी दरकने से हुआ दर्दनाक हादसा, मलबे में दबे शवों को एलएंडटी मशीन की मदद से निकाला गया।
हिमाचल प्रदेश के तिंदी-किलाड़ मार्ग पर शुक्रवार को हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। पहाड़ी से अचानक भारी चट्टानें गिरने से एक टाटा सूमो पूरी तरह मलबे में दब गई। हादसा इतना भयावह था कि वाहन पूरी तरह चकनाचूर हो गया और उसकी पहचान करना भी मुश्किल हो गया। इस दर्दनाक दुर्घटना में 13 लोगों की जान चली गई।
मलबे से शव निकालने में करनी पड़ी कड़ी मशक्कत
हादसे के बाद पुलिस, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और प्रशासन की संयुक्त टीम ने राहत एवं बचाव अभियान चलाया। चट्टानों के नीचे दबे वाहन तक पहुंचने के लिए पहले भारी मलबा हटाया गया। कई शव वाहन के अंदर फंसे हुए थे और कुछ बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए थे।
एलएंडटी मशीन की सहायता से मलबा हटाकर शवों को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। बचाव अभियान कई घंटों तक जारी रहा।
बच्चों को स्कूल छोड़ लौट रहे थे माता-पिता
यह हादसा कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म छोड़ गया। मृतकों में कमला कुमारी और उनके पति बुद्धि सिंह भी शामिल थे। दोनों कुछ दिन पहले अपने बच्चों को कुल्लू छोड़ने आए थे। शुक्रवार को वे टैक्सी से पांगी लौट रहे थे।
बच्चों को जल्द वापस मिलने का भरोसा देकर निकले दंपती को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि सफर के बीच मौत उनका इंतजार कर रही है। रास्ते में गोरना के पास पहाड़ी दरकने से भारी चट्टानें वाहन पर आ गिरीं और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे के बाद उनके बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया।
अचानक पहाड़ी दरकने से हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, हादसा शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे कडूनाला और श्योर के बीच गोरना के पास हुआ। टाटा सूमो हिंदी से पांगी की ओर जा रही थी, तभी अचानक पहाड़ी से विशाल चट्टानें वाहन पर आ गिरीं। वाहन पूरी तरह दब गया और उसमें सवार लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
इस हादसे ने एक बार फिर हिमाचल के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और चट्टानें गिरने के खतरे को उजागर कर दिया है।
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