250 करोड़ रुपये के कथित छात्रवृत्ति घोटाले में ईडी को मिली बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने कहा—मनी ट्रेल की जांच के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी।
हिमाचल प्रदेश के चर्चित 250 करोड़ रुपये के पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन रजनीश बंसल को मिली अग्रिम जमानत रद्द कर दी है।
इस फैसले के बाद उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच के लिए आरोपित से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि गंभीर आर्थिक अपराधों में जांच एजेंसियों को स्वतंत्र और प्रभावी जांच का अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल जांच की आवश्यकता को ध्यान में रखकर दिया गया है और इसे मामले के आरोपों पर अंतिम टिप्पणी नहीं माना जाना चाहिए।
ईडी ने अदालत में क्या दलील दी?
ईडी ने अदालत को बताया कि यह मामला अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के विद्यार्थियों के लिए जारी पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति राशि के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है।
एजेंसी का कहना था कि धन के प्रवाह (मनी ट्रेल) और कथित मनी लॉन्ड्रिंग की पूरी श्रृंखला का खुलासा तभी संभव है, जब आरोपित से हिरासत में पूछताछ की जाए। ईडी ने यह भी तर्क दिया कि अग्रिम जमानत के कारण जांच प्रभावित हो रही थी।
पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त योजना है, जिसके तहत SC, ST और OBC वर्ग के पात्र विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
वर्ष 2018 में शिक्षा विभाग की जांच के दौरान छात्रवृत्ति वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के संकेत मिले। आरोप है कि वर्ष 2012-13 से 2017-18 के बीच राज्य के कई निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जी प्रवेश, कथित जाली दस्तावेज और अन्य अनियमित तरीकों का इस्तेमाल कर छात्रवृत्ति की राशि प्राप्त की।
इस कथित घोटाले से सरकारी खजाने को लगभग 250 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जांच में 22 से अधिक निजी शिक्षण संस्थानों की भूमिका भी सामने आई थी।
सीबीआई जांच के बाद ईडी ने दर्ज किया मनी लॉन्ड्रिंग का मामला
वर्ष 2019 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के निर्देश दिए थे। सीबीआई ने जांच के बाद कई निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों, अधिकारियों और अन्य आरोपितों के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश समेत विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किए।
सीबीआई जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अलग से मामला दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। इसी जांच के दौरान ईडी ने रजनीश बंसल को मिली अग्रिम जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब शीर्ष अदालत ने रद्द कर दिया है।
जांच में आ सकती है तेजी
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद ईडी को मामले की जांच आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण राहत मिली है। अब एजेंसी आरोपित से हिरासत में पूछताछ कर कथित मनी ट्रेल, वित्तीय लेन-देन और अन्य संबंधित पहलुओं की गहन जांच कर सकेगी।
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