शिमला।
हिमाचल प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की एक बड़ी खबर है। आने वाले वर्षों में राज्य में बिजली की आपूर्ति को पहले से कहीं अधिक स्थिर, भरोसेमंद और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (HPERC) ने एक नए रोडमैप को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत वर्ष 2030-31 तक बिजली कटौती की अवधि और उसकी आवृत्ति (बार-बार बिजली जाने की समस्या) में क्रमिक कमी लाने का लक्ष्य तय किया गया है। इस निर्णय का सीधा फायदा घरेलू उपभोक्ताओं, दुकानदारों, छोटे कारोबारियों, किसानों, पर्यटन क्षेत्र और उद्योगों को मिलेगा।
अगले 6 वर्षों के लिए अनंतिम प्रक्षेपवक्र (Trajectory) स्वीकृत
नियामक आयोग ने राज्य बिजली बोर्ड के लिए वित्त वर्ष 2025-26 से लेकर वर्ष 2030-31 तक बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता में सुधार करने का एक अनंतिम प्रक्षेपवक्र स्वीकृत किया है।
इसी के आधार पर आगामी वर्षों में बिजली वितरण व्यवस्था का आधुनिकीकरण और सुधार किया जाएगा। अक्सर उपभोक्ताओं की तरफ से बिजली गुल होने और लंबे समय तक आपूर्ति बहाल न होने की शिकायतें आती रहती हैं।
इस नए रोडमैप के लागू होने से न केवल बिजली कटौती के मामलों में कमी आएगी, बल्कि यदि किसी तकनीकी खराबी के कारण बिजली बाधित होती भी है, तो उसे पहले की तुलना में बहुत तेजी से बहाल करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग लक्ष्य
आयोग ने भौगोलिक और ढांचागत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग प्रदर्शन लक्ष्य (Performance Targets) निर्धारित किए हैं। इसके तहत वर्ष-दर-वर्ष बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता को सुधारा जाएगा। मुख्य उद्देश्य यह है कि:
उपभोक्ताओं को सालभर में कम से कम समय के लिए बिजली कटौती का सामना करना पड़े।
अचानक होने वाले बिजली व्यवधानों की कुल संख्या में बड़ी कमी लाई जा सके।
वितरण प्रणाली को पूरी तरह से 'उपभोक्ता-केंद्रित' बनाया जाए।
बिजली जाने पर कम होगी परेशानी, सुधरेंगे मानक
आयोग ने बिजली बोर्ड को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 'ग्राहक औसत व्यवधान अवधि' (CAIDI) और 'ग्राहक औसत व्यवधान आवृत्ति' (CAIFI) जैसे वैश्विक मानकों में तत्काल सुधार किया जाए।
इसका मतलब यह है कि अगर तकनीकी कारणों से बिजली गुल भी होती है, तो उपभोक्ताओं को आपूर्ति बहाली के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और कारोबार पर बिजली कटौती का असर न्यूनतम हो जाएगा।
इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बिजली बोर्ड को आने वाले छह वर्षों में बड़े पैमाने पर तकनीकी उन्नयन (Technical Upgradation) और निगरानी तंत्र को मजबूत करना होगा।
स्मार्ट मीटरिंग से व्यवस्था में आएगी पारदर्शिता
पूरी बिजली व्यवस्था को जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए 'स्मार्ट मीटरिंग' को इसका मुख्य आधार बनाया गया है। भविष्य में बिजली आपूर्ति और अघोषित बिजली कटौती से जुड़े सभी वास्तविक आंकड़े किसी मानवीय हस्तक्षेप के बिना, सीधे स्मार्ट मीटरों, फीडरों और वितरण ट्रांसफार्मरों (Transformers) से डिजिटल रूप में प्राप्त होंगे।
इससे बिजली बोर्ड की कार्यप्रणाली में सुधार होगा और उपभोक्ताओं को बिना किसी बाधा के बेहतर बिजली मिल सकेगी।