नई दिल्ली।
माउंट एवरेस्ट की दुर्गम ऊंचाइयों पर कुदरत का एक ऐसा चमत्कार सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया के पर्वतारोहियों को हैरान कर दिया है। 52 वर्षीय अनुभवी शेरपा गाइड दावा 'हिलेरी' ने बिना खाना, पानी और सप्लीमेंट्री ऑक्सीजन के एवरेस्ट की डेथ जोन (Death Zone) में 6 दिन बिता दिए।
जहां इस कड़ाके की ठंड में कुछ घंटे बिताना नामुमकिन होता है, वहां दावा ने न सिर्फ खुद को जिंदा रखा, बल्कि मौत को मात देकर सुरक्षित नीचे भी लौट आए। गुरुवार सुबह वह एवरेस्ट के बेस कैंप के पास सुरक्षित मिले। इस बीच दावा के परिवार ने उन्हें मृत मानकर उनके अंतिम संस्कार तक की तैयारियां शुरू कर दी थीं।
एवरेस्ट की दुर्गम ऊंचाइयों पर खराब मौसम के बीच दावा ने अद्भुत इच्छाशक्ति दिखाते हुए बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन और भोजन के 25,000 फीट से 17,000 फीट तक का लंबा और कठिन सफर तय किया।
चढ़ाई का सीजन आधिकारिक रूप से खत्म होने के कारण सबसे खतरनाक माने जाने वाले खुम्बु आइसफॉल से रस्सियां और सीढ़ियां हटा दी गई थीं, जिसे उन्होंने अकेले ही पार किया।
इस दौरान उन्होंने बर्फ पिघलाकर पानी की कमी पूरी की और पुराने टेंटों में बचे बिस्किट व कचरे में फेंकी हुई ऑक्सीजन बोतलों के सहारे अपनी जान बचाई। दूसरी ओर, 6 दिनों तक उनका कोई सुराग न मिलने के कारण परिवार ने उन्हें मृत मान लिया था और घर में उनके अंतिम संस्कार की रस्में भी शुरू हो गई थीं।
29 मई को 'येलो बैंड' के पास से हुए थे लापता
यह घटनाक्रम 28 मई की शाम को शुरू हुआ, जब दावा शेरपा ब्रिटिश पर्वतारोही क्रिस थ्रॉल और एक पोलिश पर्वतारोही के दल के साथ चोटी से नीचे उतर रहे थे। उन्हें आखिरी बार 29 मई को 'येलो बैंड' के पास देखा गया था।
ब्रिटिश रॉयल मरीन के पूर्व जवान क्रिस थ्रॉल ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर बताया, "नीचे लौटते समय दावा अपना बैकपैक रखकर आराम करने बैठ गए। जब मैंने उनसे पूछा कि क्या वे ठीक हैं, तो उन्होंने कहा- 'मैं ठीक हूँ, तुम आगे बढ़ो।'
मेरे पास केवल आधा टैंक ऑक्सीजन बची थी और पोलिश पर्वतारोही को फ्रॉस्टबाइट हो गया था। उसे बचाने के लिए मुझे दावा को वहीं छोड़ना पड़ा, क्योंकि दावा पहले भी सैकड़ों बार एवरेस्ट फतह कर चुके थे।"
बेस कैंप पहुंचकर थ्रॉल ने तुरंत दावा के लापता होने की सूचना दी थी। दावा ने बताया कि उन्होंने एवरेस्ट पर छोड़े गए पुराने टेंटों से बिस्किट का एक पैकेट ढूंढा और बर्फ पिघलाकर पानी की कमी पूरी की। वे कैंपों में फेंकी गई खाली ऑक्सीजन बोतलों में बची-खुची गैस के सहारे सांस लेते रहे।
रस्सियाँ और सीढ़ियाँ हटने के बाद भी पार किया खुम्बु आइसफॉल
चढ़ाई का आधिकारिक सीजन खत्म होने के कारण 'सागरमाथा पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी' की सफाई टीम रास्ते से रस्सियाँ, सीढ़ियाँ और अन्य उपकरण हटा रही थी। इसी दौरान टीम ने दावा को 'क्रैम्पॉन पॉइंट' के पास रेंगते हुए देखा और तुरंत उन्हें रेस्क्यू कर नीचे लाई।
दावा ने बिना किसी मानवीय सहायता के एवरेस्ट के सबसे खतरनाक 'खुम्बु आइसफॉल' को अकेले पार किया, जो इस स्थिति में लगभग असंभव माना जाता है। गंभीर फ्रॉस्टबाइट और अत्यधिक कमजोरी के कारण उन्हें तुरंत काठमांडू के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों ने उन्हें खतरे से बाहर बताया है।