धर्मशाला।
कहते हैं कि अगर इरादे नेक और मेहनत सच्ची हो, तो इंसान उसी मुकाम पर सम्मान के साथ लौटता है जहाँ से उसने सफर शुरू किया था। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय धर्मशाला (Dharamshala College) में आज ऐसा ही एक ऐतिहासिक और भावुक पल देखने को मिला, जब कॉलेज की पूर्व छात्रा दिव्या ज्योति कटोच हिमाचल प्रशासनिक सेवा (HAS) अधिकारी बनकर अपने शिक्षण संस्थान पहुंचीं।
दिव्या ज्योति कटोच, जो वर्तमान में उपायुक्त कार्यालय कांगड़ा में बतौर तहसीलदार (प्रशिक्षु) तैनात हैं, जब कॉलेज पहुंचीं तो पूरा परिसर 'वेलकम बैक' के नारों और तालियों से गूंज उठा।
यह वही कॉलेज है जहाँ से उन्होंने मात्र दो साल पहले स्नातक की डिग्री पूरी की थी। एक छात्रा से एक प्रशासनिक अधिकारी तक का उनका यह सफर कॉलेज के वर्तमान विद्यार्थियों के लिए किसी सपने के सच होने जैसा था।
कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर राकेश पठानिया ने दिव्या का स्वागत करते हुए कहा, एक शिक्षक के लिए इससे बड़ा पुरस्कार और कुछ नहीं हो सकता कि उसकी पढ़ाई हुई छात्रा इतनी कम उम्र में प्रदेश के सर्वोच्च पद पर आसीन होकर वापस आए।
दिव्या की सफलता ने हमारे संस्थान के गौरव को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश शर्मा, राजनीतिक विज्ञान के प्रो. अश्वनी चौधरी और प्रो. संजय ने दिव्या के कॉलेज के दिनों को याद करते हुए उन्हें एक अत्यंत मेधावी और अनुशासित छात्रा बताया।
धर्मशाला के सिविल लाइन क्षेत्र की रहने वाली दिव्या ज्योति ने वर्ष 2024 में इसी कॉलेज से अपनी ग्रेजुएशन पूरी की। अपनी कड़ी मेहनत और सही रणनीति के दम पर उन्होंने 2025 में अपने पहले ही प्रयास में HAS की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली।
दिव्या ने अपनी सफलता का श्रेय पिता भूपिंदर चंद कटोच और माता अनुपमा कटोच के अटूट विश्वास को दिया। उन्होंने बताया कि कॉलेज की लाइब्रेरी, ग्रुप डिस्कशन और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उनके बेस को मजबूत किया।
अपनी इस भावुक घर-वापसी के दौरान दिव्या ज्योति ने कॉलेज की छात्राओं को एक विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा बेटियों के लिए कोई भी राह कठिन नहीं है। समाज या परिस्थितियों को अपनी कमजोरी न बनाएं, बल्कि अपनी ताकत बनाएं।
अगर आपका लक्ष्य स्पष्ट है और मेहनत निरंतर है, तो सफलता आपके कदम चूमेगी। खुद पर विश्वास रखें और अपनी शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएं। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि समूह चर्चा (Group Discussion) और वर्तमान विषयों पर अपनी पकड़ मजबूत करें।