शिमला।
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित चेस्टर हिल-2 और चेस्टर हिल-4 प्रोजेक्ट्स में करोड़ों रुपये के कथित बेनामी जमीन सौदों का मामला गरमा गया है। अधिवक्ता विनय शर्मा ने छोटा शिमला थाना में एक औपचारिक शिकायत दर्ज करवाकर सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रोजेक्ट संचालकों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
क्या है मुख्य आरोप?
शिकायत के अनुसार, चेस्टर हिल प्रोजेक्ट के नाम पर आपसी मिलीभगत से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेनामी जमीनें खरीदी गईं। आरोप है कि ये सौदे हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट, 1972 की धारा 118 का सीधा उल्लंघन हैं।
शिकायतकर्ता का दावा है कि इस अपराध की साजिश शिमला और सोलन दोनों जगहों पर रची गई, इसलिए शिमला पुलिस को इस पर कार्रवाई का पूरा अधिकार है।
SDM की जांच रिपोर्ट ने खोली पोल
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब राजीव शांडिल की शिकायत पर SDM सोलन पूनम शर्मा ने जांच की। जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जमीन के वास्तविक लाभार्थियों (Beneficiaries) को जानबूझकर छिपाया गया।
लेनदेन पूरी तरह से 'बेनामी' पाया गया। SDM ने इस मामले में ED (प्रवर्तन निदेशालय) और आयकर विभाग से जांच कराने की सिफारिश की थी, क्योंकि इसमें 'अपराध की कमाई' (Proceeds of Crime) की प्रबल आशंका जताई गई है।
प्रशासनिक मिलीभगत और पद के दुरुपयोग के आरोप
अधिवक्ता विनय शर्मा ने आरोप लगाया है कि SDM की रिपोर्ट के बावजूद अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) और वर्तमान कार्यवाहक मुख्य सचिव संजय गुप्ता के कार्यालय द्वारा FIR दर्ज करने की प्रक्रिया को रोका गया।
शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है कि इसी अवधि के दौरान मुख्य सचिव ने पंजाब के खरड़ में 3.18 एकड़ जमीन खरीदी।वार्षिक संपत्ति विवरण में इसकी कीमत ₹1.38 करोड़ दिखाई गई, जबकि बाजार मूल्य लगभग ₹25 करोड़ आंका जा रहा है। आरोप है कि चेस्टर हिल प्रोजेक्ट से जुड़े 'अवैध धन' का उपयोग इस जमीन खरीद में किया गया हो सकता है।
प्रमुख मांगें और कानूनी धाराएं
शिकायतकर्ता ने पुलिस से निम्नलिखित धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है:
भारतीय न्याय संहिता (BNS): धारा 318 (धोखाधड़ी), 336/338/340 (जालसाजी), और 61 (आपराधिक साजिश)।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम: धारा 7 और 13।