दिल्ली क्राइम ब्रांच ने फरीदाबाद से एजेंट राजेंद्र को किया गिरफ्तार, अब तक 14 आरोपी गिरफ्तार और 37 वाहन बरामद
चोरी की लग्जरी गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे वैध वाहन दिखाकर अलग-अलग राज्यों में बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह की जांच में एक और अहम कड़ी सामने आई है। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने फरीदाबाद से एजेंट राजेंद्र को गिरफ्तार किया है।
जांच के अनुसार, राजेंद्र बिलासपुर RLA से जुड़े मुख्य आरोपी गौरव के लिए एजेंट के तौर पर काम करता था। आरोप है कि चोरी की गाड़ियों के फर्जी रजिस्ट्रेशन से संबंधित काम वह मुख्य आरोपी तक पहुंचाता था।
चेसिस नंबर में हेरफेर कर बदली जाती थी गाड़ियों की पहचान
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने इस मामले में 9 जनवरी को FIR दर्ज की थी। इसके बाद चोरी की लग्जरी गाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नई पहचान देकर बेचने वाले नेटवर्क की जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि गिरोह चोरी की गाड़ियों को सीधे बेचने के बजाय पहले उनकी पहचान बदलता था। इसके लिए वाहनों के चेसिस नंबर में हेरफेर किया जाता था। कुछ मामलों में पुरानी या पानी में डूबी गाड़ियों के चेसिस नंबर का इस्तेमाल चोरी की गाड़ियों पर किए जाने की बात सामने आई है।
इसके बाद कथित तौर पर फर्जी सेल लेटर, फॉर्म-21, NOC, बैंक NOC और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर चोरी की गाड़ियों को दूसरे राज्यों के RLA में पंजीकृत करवाकर वैध वाहन के तौर पर दिखाने का प्रयास किया जाता था।
बिलासपुर RLA से जुड़ी अहम कड़ी
जांच के दौरान इस नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी बिलासपुर RLA से जुड़ी मिली है। आरोप है कि एजेंटों और कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चोरी की गाड़ियों का पंजीकरण करवाया गया।
जांच एजेंसी को दिल्ली से चोरी हुई दो फॉर्च्यूनर गाड़ियों के बारे में भी अहम सुराग मिले हैं। दोनों वाहन बरामद किए जा चुके हैं। इनमें एक का पंजीकरण नंबर HP 24 E 4948 और दूसरे का HP 24 E 3974 बताया गया है।
जांच के अनुसार, इन वाहनों के चेसिस नंबर में हेरफेर किया गया था और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन्हें बिलासपुर RLA में पंजीकृत करवाया गया।
14 आरोपी गिरफ्तार, 37 वाहन बरामद
फरीदाबाद से राजेंद्र की गिरफ्तारी के बाद मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 14 हो गई है। जांच एजेंसी अब तक नेटवर्क से जुड़ी 37 गाड़ियां बरामद कर चुकी है।
अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फरीदाबाद में बैठकर राजेंद्र किन-किन लोगों के संपर्क में था और उसने कितने वाहनों के फर्जी रजिस्ट्रेशन से जुड़े काम मुख्य आरोपी गौरव तक पहुंचाए।
हिमाचल और पंजाब में भी नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
2025 के मामले से मिले थे अहम सुराग
जांच टीम को वर्ष 2025 में दिल्ली के एक थाने में दर्ज मामले से भी इस नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले थे। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने गिरोह की गतिविधियों और उससे जुड़े लोगों की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।
जांच में चोरी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी और चोरी की संपत्ति की पहचान बदलकर उसे बेचने से जुड़े आरोपों की कड़ियां सामने आई हैं।
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