पर्युषण के दूसरे दिन स्वाध्यायी संजीव जैन और अशोक जैन ने जैन धर्म के सिद्धांतों पर डाला प्रकाश, आत्मशुद्धि और अहिंसा का दिया संदेश
जैन धर्म के महापर्व पर्युषण के दूसरे दिन सोमवार को सुजानपुर जैन स्थानक में धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा-प्रवचन में भाग लेकर धर्म लाभ लिया।
इस अवसर पर स्वाध्यायी संजीव जैन और अशोक जैन ने जैन धर्म के सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं को अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
स्वाध्यायियों ने कहा कि जैन धर्म मनुष्य को अपने कर्मों में सुधार करने और आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने आचरण और कर्मों पर चिंतन करते हुए मोक्ष के मार्ग की ओर बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।
आत्मशुद्धि का पर्व है पर्युषण
जैन सभा सुजानपुर के प्रधान गौरव जैन ने श्रद्धालुओं से पर्युषण पर्व के दौरान अधिक से अधिक धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्युषण केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का पर्व है।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से रोजाना जैन स्थानक में आयोजित होने वाले कथा-प्रवचन में शामिल होने और पर्युषण पर्व के आध्यात्मिक संदेश को अपने जीवन में अपनाने का आग्रह किया।
क्या है पर्युषण पर्व और जैन धर्म का इतिहास?
जैन धर्म भारत के प्राचीन धर्मों में से एक है। जैन परंपरा में 24 तीर्थंकरों का विशेष महत्व है। इनमें प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव और 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी माने जाते हैं। भगवान महावीर ने अहिंसा, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश दिया।
पर्युषण पर्व जैन समाज का प्रमुख आध्यात्मिक पर्व है। श्वेतांबर परंपरा में इसे आठ दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु संयम, तप, त्याग और आत्मचिंतन पर विशेष जोर देते हैं। कई जैन परिवार इन दिनों हरी सब्जियों और जमीकंद आदि का त्याग भी करते हैं।
पर्युषण के दौरान जैन धर्म में बताए गए दस धर्मों—क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन और ब्रह्मचर्य के पालन पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
पर्व के अंतिम दिन संवत्सरी मनाई जाती है। इस अवसर पर जैन समाज के लोग एक-दूसरे से “मिच्छामि दुक्कडम” कहकर जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगते हैं। यह परंपरा आपसी सद्भाव, क्षमा और आत्मचिंतन का संदेश देती है।
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