एसडीएम राजकुमार ठाकुर ने स्वामी शरभेश्वरानंद भैरव महाराज के समाजसेवा और गौसेवा कार्यों को सराहा, कलश यात्रा, भजन-कीर्तन, कन्या पूजन और विशाल भंडारे में शामिल हुए श्रद्धालु
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के राजगढ़ उपमंडल में गिरीपुल के समीप करोड़ गांव स्थित काली मठ में मां भद्रकाली का तृतीय पाटोत्सव श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया।
मठ के संस्थापक स्वामी शरभेश्वरानंद भैरव महाराज के सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक समारोह में मां भगवती के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में शीश नवाकर सुख-समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम में एसडीएम राजगढ़ राजकुमार ठाकुर ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
कलश यात्रा और भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ काली मठ
पाटोत्सव के दौरान काली मठ परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, माता की चौकी, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कलश यात्रा निकाली और मां भगवती का गुणगान किया। पंजाब से पहुंचे गायक विश्वजीत शर्मा और उनकी संकीर्तन मंडली ने भजनों की प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
समारोह में क्षेत्र के श्रद्धालुओं के साथ विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, संत-महात्माओं और गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया।
एसडीएम राजकुमार ठाकुर ने की समाजसेवा और गौसेवा की सराहना
एसडीएम राजगढ़ राजकुमार ठाकुर ने ज्योत प्रज्वलित कर मां भद्रकाली का आशीर्वाद लिया। इस दौरान स्वामी शरभेश्वरानंद भैरव महाराज ने अतिथियों का पटका पहनाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया।
एसडीएम ने पाटोत्सव की बधाई देते हुए स्वामी जी के समाजकल्याण, जनसेवा और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने काली मठ को साधना और आध्यात्मिक शांति का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए साधकों की आध्यात्मिक साधना सफल होने की कामना की।
‘कमला कल्याणी गौशाला’ के माध्यम से गौसंरक्षण का संदेश
पाटोत्सव के दौरान गौसेवा और बेसहारा गौवंश के संरक्षण का संदेश भी प्रमुखता से दिया गया। स्वामी शरभेश्वरानंद भैरव महाराज द्वारा अपनी पूज्य माता के नाम पर शुरू की गई ‘कमला कल्याणी गौशाला’ का विशेष उल्लेख किया गया।
एसडीएम राजकुमार ठाकुर ने गौसेवा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गौवंश का संरक्षण भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने समाज से गौवंश की देखभाल और संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
‘काली वाहिनी’ के नाम से संगठित हुईं क्षेत्र की महिलाएं
मां भद्रकाली के तृतीय पाटोत्सव में महिलाओं की सहभागिता भी आकर्षण का केंद्र रही। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में कलश यात्रा में भाग लिया और धार्मिक उत्साह के साथ माता का गुणगान किया।
इस अवसर पर पूज्य गुरुमां भद्रप्रिया नंद भैरवी ने कलश यात्रा में शामिल महिलाओं का आभार व्यक्त किया। महिलाओं के इस समूह को ‘काली वाहिनी’ नाम दिया गया। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना तथा उनमें एकजुटता, सेवा और सामूहिक सहभागिता की भावना को मजबूत करना है।
कार्यक्रम में महंत सूरज नाथ जी महाराज ने मां भद्रकाली के दिव्य स्वरूप और महिमा का वर्णन किया। उन्होंने काली मठ को आध्यात्मिक चेतना और साधना का महत्वपूर्ण केंद्र बताया।
कन्या पूजन के बाद विशाल भंडारा, श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
धार्मिक समारोह के समापन पर कन्या पूजन किया गया। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर काली मठ फाउंडेशन के चेयरमैन सुनील शर्मा, हिंदू तख्त के अध्यक्ष, महंत सूरज नाथ जी महाराज सहित विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, संत-महात्मा और क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
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