कांगड़ा
महाशिवरात्रि का पावन पर्व पूरे भारतवर्ष में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में नूरपुर क्षेत्र स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक डिब्केश्वर महादेव शिव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
यह शिव मंदिर अपनी अनूठी मान्यता और स्वयंभू शिवलिंग पिंडियों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां शिव गुफा में भगवान भोलेनाथ स्वयंभू शंभू पिंडियों के रूप में विराजमान हैं, ऐसा आस्था का स्वरूप भारत में बहुत ही कम स्थानों पर देखने को मिलता है।
महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर कमेटी द्वारा मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। चारों ओर “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंज रहे हैं। सुबह तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं।
भक्त भगवान शिव का जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा से अभिषेक कर रहे हैं। कई श्रद्धालु व्रत रखकर विशेष पूजा-अर्चना में भाग ले रहे हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि व उत्तम स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं।
कथा अनुसार मान्यता
मान्यता है कि सदियों पहले इस शिव गुफा में दूध की धाराएं स्वतः बहा करती थीं, जो स्वयंभू शंभू शिवलिंग का अभिषेक करती थीं। इसके प्रमाण आज भी देखने को मिलते हैं। कहा जाता है कि गुफा की मिट्टी से तिलक लगाने पर वह सूखकर चंदन के तिलक जैसा प्रतीत होता है।
वर्तमान में भी गुफा से निकलने वाला जल स्वयंभू शिवलिंग पिंडियों का जलाभिषेक करता है। सतयुग काल में यहां से एक गुफा के हरिद्वार तक जाने की भी मान्यता प्रचलित है।
मंदिर कमेटी का बयान
मंदिर कमेटी के प्रधान राजेश भारद्वाज ने बताया कि श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला सुबह करीब तीन बजे से ही शुरू हो गया था। दूर-दूर से लोग पूजा-अर्चना के लिए यहां पहुंच रहे हैं। आज मंदिर परिसर में विधिवत हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया तथा श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई है।