हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के चौपाल उपमंडल के सराहां क्षेत्र की चिंगजार पंचायत के चिऊना लिंगजार गांव में स्थित शिरगुल महाराज मंदिर आग लगने से पूरी तरह जलकर राख हो गया। ग्रामीणों के सहयोग से करीब छह वर्षों में तैयार हुआ यह मंदिर 21 सितंबर को होने वाली शिखा स्थापना से पहले ही आग की भेंट चढ़ गया।
लकड़ी का बना होने से तेजी से फैली आग
मंदिर का निर्माण देवदार की लकड़ी, पत्थर और स्लेट की छत से किया गया था। लकड़ी का ढांचा होने के कारण आग ने देखते ही देखते पूरे मंदिर को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ ही समय में पूरा भवन जलकर राख हो गया।
घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन मंदिर को भारी नुकसान पहुंचा है।
ग्रामीणों ने बुझाने की कोशिश की, लेकिन नहीं बच सका मंदिर
आग लगने की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और आग बुझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन आग इतनी तेजी से फैल चुकी थी कि मंदिर को बचाया नहीं जा सका।
मंदिर के निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे और गांव के लोगों ने आपसी सहयोग से इसे तैयार किया था।
निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका था
ग्रामीणों के अनुसार मंदिर के निर्माण में लगभग छह वर्ष लगे। निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका था और केवल रंग-रोगन तथा बिजली फिटिंग का काम शेष था। मंदिर में बिजली का मीटर भी लगाया जा चुका था और ग्रामीण 21 सितंबर को शिखा स्थापना समारोह की तैयारियों में जुटे हुए थे।
पुलिस जांच में जुटी, ग्रामीणों ने किसी पर नहीं जताया शक
घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। वहीं ग्रामीणों ने भी किसी व्यक्ति पर संदेह व्यक्त नहीं किया है।
पुलिस का कहना है कि आग लगने के कारणों की गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
follow us on facebook
subscribe to us on youtube