लाहौल-स्पीति
हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला है। गोंदला क्षेत्र के सामने पीर पंजाल की ऊंची चोटियों पर स्थित यानदे गंग ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया। इस हिमस्खलन (Avalanche) के कारण एक विशाल बर्फीला तूफान उठा, जिसने घाटी के कई गांवों में दहशत पैदा कर दी।
यह घटना शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे हुई। पीर पंजाल की चोटी पर स्थित सैकड़ों साल पुराने हिमनद का टूटा हुआ हिस्सा सीधे नीचे चंद्रा नदी में जा गिरा। हिमस्खलन से उठा बर्फीला गुबार और तेज हवाएं नदी के पार स्थित रालिंग, खंगसर, जांगला और मूर्तिचा गांवों तक महसूस की गईं।
राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी भी प्रकार के जान-माल या संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
क्यों हुआ हिमस्खलन?
गोंदला पंचायत के प्रधान सूरज ठाकुर और विशेषज्ञों के अनुसार, घाटी में इस तरह के एवलांच सामान्य हैं, लेकिन हालिया बर्फबारी के बाद तापमान में अचानक हुई बढ़ोतरी ने ग्लेशियर के हिस्से को अस्थिर कर दिया। हिमनद का जो हिस्सा कमजोर पड़ा था, वह गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे आ गिरा।
बढ़ती चिंता: सिकुड़ रहे हैं ग्लेशियर
स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है कि लगातार होते हिमस्खलन और जलवायु परिवर्तन के कारण घाटी के ग्लेशियरों का आकार धीरे-धीरे सिकुड़ रहा है। फरवरी महीने में हिमाचल में सामान्य से 86% कम बारिश/बर्फबारी दर्ज की गई है, जो आने वाले समय में जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत दे सकती है।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान:
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, प्रदेश में 6 मार्च तक मौसम साफ रहने का अनुमान है। हालांकि, तापमान में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे ऊना जैसे मैदानी इलाकों में पारा 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।