शिमला।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का अगला चरण हंगामेदार रहने के आसार हैं। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विधायकों ने जनहित और प्रदेश की कार्यप्रणाली से जुड़े 834 प्रश्नों की झड़ी लगा दी है।
वहीं, दूसरी ओर सदन की गरिमा और विशेषाधिकारों के मामलों में हो रही देरी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए विशेषाधिकार समिति ने प्रदेश के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
विधानसभा सचिवालय को अब तक कुल 834 प्रश्न प्राप्त हुए हैं, जिनमें तारांकित और अतारांकित दोनों श्रेणियां शामिल हैं। इन प्रश्नों में सड़कों की बदहाली, बजट घोषणाओं का क्रियान्वयन, कर्मचारियों के देय भत्ते, पर्यटन परियोजनाएं और हाल ही में सरकार द्वारा लिए गए वित्तीय फैसलों (वेतन स्थगन और कैबिनेट रैंक खत्म करना) पर स्पष्टीकरण
मांगा गया है। संबंधित विभागों को इन प्रश्नों के उत्तर समयबद्ध तरीके से तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सदन में चर्चा के दौरान पारदर्शिता बनी रहे।
सदन की विशेषाधिकार समिति (Privilege Committee) ने मुख्य सचिव को पेश होने के आदेश दिए हैं। इसका मुख्य कारण विधायकों द्वारा उठाए गए विशेषाधिकार हनन के मामलों में प्रशासनिक स्तर पर होने वाली अत्यधिक देरी है।
समिति का मानना है कि कई मामलों में रिपोर्ट भेजने और कार्रवाई करने में अधिकारी ढिलाई बरत रहे हैं। विधायकों के प्रोटोकॉल और उनके द्वारा उठाए गए गंभीर मुद्दों पर अधिकारियों के उदासीन रवैये को लेकर समिति ने कड़ा रुख अपनाया है।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू द्वारा हाल ही में लिए गए 'किफायती' फैसलों (कैबिनेट रैंक खत्म करने और वेतन रोकने) के बाद यह सत्र राजनीतिक रूप से काफी गर्म रहने वाला है। विपक्ष इन फैसलों को आधार बनाकर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रहा है, जबकि सत्तापक्ष इसे 'आत्मनिर्भर हिमाचल' की दिशा में एक साहसिक कदम के रूप में पेश करेगा।